मधेपुरा. पार्वती विज्ञान महाविद्यालय में बुधवार को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) के निर्देशानुसार राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने पर संगोष्ठी आयोजित की गई. कार्यक्रम का विषय "शैक्षणिक एवं संवादात्मक गतिविधि" रखा गया, जिसमें नई शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.
नई शिक्षा नीति को बताया परिवर्तनकारी पहल
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. पवन कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देती है तथा शिक्षा को जीवनोपयोगी और समाजोपयोगी बनाती है.
एनएसएस से विकसित होती है सामाजिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम का संचालन कर रहे एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. चंद्रदेव ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं.
बहुविषयक शिक्षा और डिजिटल तकनीक पर चर्चा
संगोष्ठी में परीक्षा नियंत्रक डॉ. ललन कुमार ललन, संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. रीता कुमारी तथा वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव जोशी सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 लागू होने के बाद बहुविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल तकनीक के समावेश और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा मिलने से विद्यार्थियों को नई दिशा मिली है.
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में डॉ. जहांगीर आलम, डॉ. अजय कुमार, डॉ. उमाशंकर प्रसाद उदय, डॉ. प्रभु कुमार साह, डॉ. विभा पाण्डे, डॉ. शंकर कुमार, डॉ. बिजली गुप्ता सहित अन्य शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, एनएसएस स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ.
