Madhepura News: मधेपुरा जिले में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना में कथित अनियमितता के मामले में की गई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. जिला प्राथमिक शिक्षक संघ मधेपुरा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, प्रधानाध्यापकों और साधनसेवियों पर हुई कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे एकतरफा और असंवैधानिक बताया है. संघ ने सरकार से कार्रवाई तत्काल वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि आदेश निरस्त नहीं किया गया, तो मामला मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा.
यह विवाद गमहरिया प्रखंड में मध्याह्न भोजन में कथित रूप से कीड़ा मिलने की घटना के बाद शुरू हुआ, जिसके आधार पर संबंधित अधिकारियों और विद्यालय कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. शिक्षक संघ का कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है.
शिक्षक संघ ने कार्रवाई को बताया एकतरफा
जिला प्राथमिक शिक्षक संघ मधेपुरा के जिला कोषाध्यक्ष शैलेश कुमार चौरसिया ने जारी बयान में कहा कि शिक्षा मंत्री द्वारा गमहरिया प्रखंड की घटना को आधार बनाकर जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, प्रधानाध्यापकों और साधनसेवियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक जिम्मेदारी तय की जा सके.
खाद्यान्न की गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी तय हो
शैलेश कुमार चौरसिया ने कहा कि विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए उपयोग होने वाला चावल सरकार द्वारा निर्धारित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराया जाता है.
उन्होंने कहा कि यदि खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण या आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित आपूर्तिकर्ता या संवेदक की भी तय होनी चाहिए. केवल विद्यालय स्तर के कर्मियों पर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.
शिक्षकों को अनावश्यक रूप से बदनाम किया जा रहा
शिक्षक संघ का दावा है कि मधेपुरा जिले में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन संतोषजनक ढंग से किया जा रहा है. संघ के अनुसार, शिक्षकों को अनावश्यक रूप से बदनाम किया जा रहा है, जबकि लंबे समय से शिक्षक संगठन इस योजना के संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं.
संघ ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में कई प्रशासनिक और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किए बिना केवल शिक्षकों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है.
मुख्यमंत्री से मुलाकात और कानूनी लड़ाई की चेतावनी
शिक्षक संघ ने सरकार से संबंधित कार्रवाई वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो संगठन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देगा.
इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय की शरण लेने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की भी चेतावनी दी गई है.
Madhepura News: सरकार पर डाली आंदोलन की जिम्मेदारी
संघ ने स्पष्ट कहा कि यदि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. संगठन का कहना है कि शिक्षक सम्मान और निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक और कानूनी विकल्प अपनाया जाएगा.
फिलहाल इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. आने वाले दिनों में सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत या आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो सकती है.
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