मधेपुरा : जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने और मॉडल सदर अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद सदर अस्पताल आज भी सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा से वंचित है. इसका खामियाजा रोजाना गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है. न्यूरो, हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना और सिर में गंभीर चोट लगने वाले मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों या भागलपुर, सहरसा, पटना तथा अन्य हायर सेंटरों में रेफर किया जाता है. इससे इलाज में देरी होने के साथ मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है.
इमरजेंसी मरीजों के लिए बढ़ रही मुश्किल
चिकित्सकों के अनुसार सिर में गंभीर चोट, ब्रेन हेमरेज या सड़क दुर्घटना के मामलों में तत्काल सीटी स्कैन आवश्यक होता है. लेकिन सदर अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों के परिजनों को एंबुलेंस से कई घंटे की दूरी तय कर दूसरे शहरों में जाना पड़ता है. इस दौरान गंभीर मरीजों की स्थिति और बिगड़ने का खतरा बना रहता है.
निजी केंद्रों में महंगी जांच, गरीब मरीज परेशान
मरीजों के परिजनों का कहना है कि निजी केंद्रों में ब्रेन सीटी स्कैन के लिए दो हजार से साढ़े तीन हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी व्यवस्था में यह जांच काफी कम शुल्क पर उपलब्ध हो सकती है. दिहाड़ी मजदूर, गरीब और बीपीएल परिवारों के लिए यह खर्च उठाना कठिन हो जाता है.
हर माह 100 से अधिक मरीज हो रहे रेफर
सदर अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा नहीं होने के कारण प्रतिमाह औसतन 100 से अधिक मरीजों को पीएमसीएच, डीएमसीएच अथवा अन्य हायर सेंटर रेफर किया जाता है. कई मामलों में मरीजों की गंभीर स्थिति के कारण रास्ते में ही मौत होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध होती तो कई गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती थी.
चिकित्सकों और कर्मियों की कमी भी बड़ी चुनौती
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का भवन और बाहरी स्वरूप भले बेहतर हो गया हो, लेकिन अंदर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है. विभिन्न विभागों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लगातार निरीक्षण के बावजूद यह समस्या बनी हुई है.
मरीजों ने उठाई ये मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने सदर अस्पताल में सीटी स्कैन यूनिट को जल्द शुरू कराने की मांग की है. साथ ही जब तक मशीन चालू नहीं होती, तब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी जांच केंद्रों से अनुबंध कर नि:शुल्क सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है. इसके अलावा 24 घंटे टेक्नीशियन और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि रात के समय आने वाले ट्रॉमा मरीजों को तत्काल जांच सुविधा मिल सके.
