मधेपुरा TV मरीजों के लिए आगे आए अधिकारी, निक्षय मित्र योजना के तहत लिया गोद, राशन किट देकर बढ़ाया हौसला

Madhepura News: मधेपुरा के कुमारखंड में निक्षय मित्र योजना के तहत टीबी के मरीजों को विशेष सहारा मिला. अधिकारियों ने टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें राशन किट वितरित की और बेहतर इलाज का आश्वासन दिया. यह पहल मरीजों को पोषण और सामाजिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है.

कुमारखंड (मधेपुरा) से रिपोर्ट

Madhepura News: टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि पोषण और सामाजिक सहयोग भी मिले. इसी सोच के साथ मंगलवार को मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड मुख्यालय में निक्षय मित्र योजना के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीडीओ, बीईओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टीवी मरीजों को गोद लेकर उन्हें राशन किट उपलब्ध कराया और बेहतर इलाज का भरोसा दिया.

कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को पोषण संबंधी सहायता देने के साथ-साथ समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी रहा. अधिकारियों ने कहा कि समय पर जांच और नियमित इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है.

निक्षय मित्र योजना के तहत मरीजों को मिला सहारा

कार्यक्रम के दौरान टेंगराहा सिकियाहा वार्ड-12 निवासी विपिन कुमार और गुड़िया रहटा वार्ड-11 निवासी गुड़िया कुमारी को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वरुण कुमार ने निक्षय मित्र योजना के तहत गोद लिया.

वहीं बीएचएम कुमार धनंजय ने गुड़िया वार्ड-11 निवासी उमेश यादव, बीडीओ प्रियदर्शी राजेश पायरेट ने ललकुरिया वार्ड-13 निवासी आलम तथा बीईओ किशोर भास्कर ने सिहपुर गढ़िया वार्ड-04 निवासी सुमन कुमार को गोद लेकर उनके इलाज और पोषण में सहयोग का संकल्प लिया.

Madhepura News: राशन किट देकर दिया बेहतर स्वास्थ्य का संदेश

अधिकारियों ने मरीजों को चावल, आटा, दाल, चना, तेल, नमक सहित अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री से युक्त राशन किट अपने हाथों से प्रदान किया. उन्होंने कहा कि टीबी के इलाज के दौरान पौष्टिक भोजन उतना ही जरूरी है, जितनी नियमित दवा.

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कोई भी मरीज पोषण की कमी के कारण इलाज बीच में न छोड़े और पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सके.

टीबी के लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच

एसटीएस राकेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मरीजों का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क किया जाता है. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहे, खांसी या बलगम में खून आए या लगातार वजन कम हो रहा हो, तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए.

उन्होंने बताया कि टीबी की पुष्टि होने पर मरीज को नि:शुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है और इलाज के दौरान पोषण सहायता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रति माह एक हजार रुपये की राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में भेजी जाती है.

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जागरूकता से ही मिलेगी टीबी पर जीत

अधिकारियों ने कहा कि 'टीबी सौ दिन कार्यक्रम' का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है, ताकि मरीजों की समय पर पहचान हो सके और इलाज में देरी न हो.

कार्यक्रम में बीडीओ प्रियदर्शी राजेश पायरेट, बीईओ किशोर भास्कर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वरुण कुमार, बीएचएम कुमार धनंजय, एसटीएस राकेश कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मी और कई मरीज मौजूद रहे.

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Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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