Madhepura Student ISRO YUVIKA 2026: मधेपुरा जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, सुखासन के कक्षा 10 के छात्र सुधांशु कुमार का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम (युविका-2026) के लिए हुआ है. इस उपलब्धि से विद्यालय, जिले और पूरे बिहार में खुशी का माहौल है. देशभर से कुल 456 विद्यार्थियों का चयन किया गया, जिनमें बिहार से केवल 14 छात्र शामिल रहे.
उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ चयन
सुधांशु कुमार का चयन कक्षा 8 के शैक्षणिक प्रदर्शन, ऑनलाइन स्पेस क्विज़, विज्ञान एवं खेल गतिविधियों, ओलंपियाड तथा भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के आधार पर किया गया.
इसरो में मिला दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण
बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) में आयोजित दो सप्ताह के आवासीय प्रशिक्षण के दौरान सुधांशु ने इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह, रॉकेट और मानव अंतरिक्ष मिशनों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की. उन्हें चंद्रयान-4 और गगनयान मिशन की तैयारियों और तकनीकों से भी अवगत कराया गया.
रॉकेट लॉन्च से लेकर सैटेलाइट टेस्टिंग तक का अनुभव
Madhepura Student ISRO YUVIKA 2026: प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने रोहिणी-200 साउंडिंग रॉकेट की लाइव कंट्रोल एवं ट्रैकिंग प्रक्रिया देखी. साथ ही सैटेलाइट असेंबली, थर्मल वैक्यूम, वाइब्रेशन, एकूस्टिक तथा ईएमआई/ईएमसी टेस्टिंग जैसी प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया. उन्होंने जीरो ग्रेविटी, रिमोट सेंसिंग और क्लीन रूम तकनीकों को भी करीब से समझा.
हैंड्स-ऑन गतिविधियों के तहत सुधांशु ने मिनी रोवर और चंद्रयान-3 किट तैयार की तथा प्रतिभागियों के साथ मिलकर बनाए गए मॉडल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया, जिसने लगभग 300 से 500 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी.
वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्री से किया संवाद
प्रशिक्षण के दौरान सुधांशु को भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, "मून मैन ऑफ इंडिया" डॉ मायलस्वामी अन्नादुराई, इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ एस. सोमनाथ, वरिष्ठ वैज्ञानिक टी. नारायणन तथा अंटार्कटिका में कार्यरत भारतीय वैज्ञानिकों से संवाद का अवसर मिला. वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को अनुसंधान, करियर निर्माण और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया.
विद्यालय ने जताया गर्व
जेएनवी मधेपुरा के प्रभारी प्राचार्य रबीन्द्र नाथ ठाकुर ने सुधांशु कुमार को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे विद्यालय, जिले और राज्य के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश के सरकारी विद्यालय से निकलकर इसरो जैसे शीर्ष संस्थान तक पहुंचना यह साबित करता है कि प्रतिभा को सही अवसर मिलने पर वह किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकती है. उन्होंने विश्वास जताया कि सुधांशु की सफलता अन्य विद्यार्थियों को भी विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी.
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