भीषण गर्मी से मधेपुरा बेहाल : 35 डिग्री के पार पहुंचा तापमान, डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़े

शहर में भीषण गर्मी और तेज धूप ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. तापमान 35 डिग्री के पार पहुंचने से डिहाइड्रेशन, बुखार और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या अस्पतालों में बढ़ गई है. छात्र-छात्राओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है.

शहर सहित आसपास के शहरी इलाकों में इन दिनों भीषण गर्मी और तेज धूप ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. सुबह होते ही सूरज की तपिश इतनी तेज हो जाती है कि दोपहर तक सड़कों पर निकलना मुश्किल हो जाता है. तापमान लगातार 35 डिग्री के पार पहुंच रहा है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. गर्म हवाएं (लू) चलने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है.

शहर के मुख्य बाजार, चौक-चौराहों और सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है. लोग अत्यावश्यक काम होने पर ही घर से बाहर निकल रहे हैं. जो लोग मजबूरी में बाहर निकलते हैं, वे सिर पर गमछा, टोपी या छाता लेकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. बावजूद इसके तेज धूप और उमस से राहत नहीं मिल रही है.

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या

भीषण गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है. सदर अस्पताल और निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है. चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों डिहाइड्रेशन, बुखार, उल्टी-दस्त, चक्कर आना और हीट स्ट्रोक के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं. खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत ज्यादा बिगड़ रही है.

अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि पहले जहां प्रतिदिन 150 से 200 मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है. ओपीडी में लंबी कतारें लग रही हैं और कई मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है. चिकित्सकों ने लोगों को बिना जरूरत धूप में बाहर नहीं निकलने, अधिक से अधिक पानी पीने, हल्का एवं पौष्टिक भोजन करने तथा धूप में निकलते समय सिर और शरीर को ढककर रखने की सलाह दी है.

कोचिंग जाने वाले छात्र-छात्राओं की बढ़ी परेशानी

भीषण गर्मी का असर पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. शहर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कोचिंग संस्थानों में पढ़ने जाती हैं, लेकिन दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण उनका आना-जाना मुश्किल हो गया है. कई छात्राओं ने बताया कि पैदल चलना कठिन हो जाता है. ऑटो और रिक्शा भी कम मिलते हैं. यदि मिलते भी हैं तो अधिक किराया देना पड़ता है. कई बार गर्मी के कारण रास्ते में चक्कर आने जैसी स्थिति बन जाती है.

अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है. वे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं. कई अभिभावकों ने कोचिंग संस्थानों का समय सुबह या शाम करने की मांग की है. कुछ संस्थानों ने समय में बदलाव भी कर दिया है, जबकि कई जगह अभी पुरानी व्यवस्था जारी है.

बारिश का इंतजार

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर वर्ष गर्मी का असर बढ़ रहा है. ऐसे में सरकार और प्रशासन को पहले से तैयारी करने की आवश्यकता है. फिलहाल शहरवासी राहत के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं. आसमान में बीच-बीच में बादल तो नजर आते हैं, लेकिन बारिश नहीं होने से उमस और बढ़ गई है. यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है.


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लेखक के बारे में

Author: Aman Kumar

Published by: Shruti Kumari

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