ज्ञान भारतम् मिशन : मधेपुरा के गौरवशाली अतीत की खोज, यदुनाथ झा यदुवर की 116 साल पुरानी मिली पांडुलिपि

ज्ञान भारतम् मिशन : मधेपुरा के गौरवशाली अतीत की खोज, यदुनाथ झा यदुवर की 116 साल पुरानी मिली पांडुलिपि

मधेपुरा . भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के तहत जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर लाने की कवायद तेज हो गयी है. जिलाधिकारी अभिषेक रंजन की पहल पर जिले के शैक्षणिक और सांस्कृतिक अतीत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हुई हैं. इसमें प्रसिद्ध देशभक्त कविवर यदुनाथ झा यदुवर की 116 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक पांडुलिपि प्रमुख है. डीएम की संवेदनशीलता ने मिशन को दी गति हाल ही में डीएम अभिषेक रंजन, मिशन के नोडल ऑफिसर सह डीडीसी अनिल बसाक, कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ भूपेंद्र नारायण मधेपुरी की बैठक हुई थी, जिसमें डीएम ने कहा था कि यदि मिशन एप पर बिहार के 38 जिलों में मधेपुरा को सर्च करने पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ, तो यह जिले के लिए निराशाजनक होगा. डीएम की इस बात को गंभीरता से लेते हुए डॉ मधेपुरी ने ऐतिहासिक दस्तावेजों की खोज तेज कर दी. स्वतंत्रता सेनानियों व विभूतियों से जुड़े दस्तावेज आये सामने डॉ मधेपुरी और कला संस्कृति पदाधिकारी ने एडवोकेट प्रशांत कुमार यादव के आवास पर जाकर उनके दादा रघुनंदन प्रसाद महतो से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्रियां प्राप्त कीं. इसमें 1905 का धातु मेडल, 1918 की डायरी, जिसमें सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की जन्मतिथि और रासबिहारी लाल मंडल की पुण्यतिथि का हस्तलिखित विवरण दर्ज है. साथ ही 1928 की एक छड़ी भी मिली है. इसके अलावा, 1896 में स्थापित सीरीज इंस्टीट्यूट का 1908 का दुर्लभ एडमिशन रजिस्टर भी खोज निकाला गया है. डिजिटलीकरण कर विश्व पटल पर दिखेगा मधेपुरा डॉ मधेपुरी ने बताया कि पांडुलिपियां जिले के गौरवशाली अतीत का प्रमाण हैं. उन्होंने 78 वर्ष पुरानी कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मेलन की पांडुलिपि भी उपलब्ध करायी है. जिला प्रशासन ने अपील की है कि जिन संस्थाओं, मठों, मंदिरों या व्यक्तियों के पास ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियां हैं, वे प्रशासन को सहयोग करें ताकि उनका डिजिटलीकरण किया जा सके. सम्मानित होंगे योगदान देने वाले लोग डीएम ने घोषणा की है कि इस मिशन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जिला स्तर पर सम्मानित किया जायेगा. इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य प्राचीन ज्ञान भंडार को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित करना है.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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