मधेपुरा शहर की सड़कों पर धूल का कहर, आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, कारोबार भी प्रभावित, नगर परिषद पर उठे सवाल

Madhapura News: शहर की सड़कें धूल के गुबार में तब्दील हो गई हैं, जिससे लोगों की सांसें और सेहत खतरे में है. राहगीरों से लेकर दुकानदारों तक, हर कोई परेशान है और नगर परिषद से प्रभावी समाधान की उम्मीद कर रहा है.

Madhapura News: सुबह घर से बाहर निकलते ही धूल का गुबार, बाजार पहुंचते-पहुंचते आंखों में जलन और शाम तक गले में खराश. यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि शहर के हजारों लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है. शहर की सड़कों पर उड़ रही धूल अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, व्यापार और यातायात से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गई है. कॉलेज चौक से लेकर बस स्टैंड रोड और गौशाला चौक तक धूल की मोटी परत लोगों की जिंदगी पर असर डाल रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमित सफाई, पानी के छिड़काव और सड़क मरम्मत के अभाव में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अब शहरवासी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर हर साल यह समस्या क्यों दोहराई जाती है और इसका स्थायी समाधान कब होगा.

शहर की सड़कों पर धूल का गुबार बना नई परेशानी

इन दिनों शहर में ट्रैफिक जाम से ज्यादा बड़ी समस्या उड़ती धूल बन गई है. प्रमुख सड़कों के साथ-साथ कई मोहल्लों की गलियों में भी धूल की मोटी परत जमी हुई है.

कॉलेज चौक, थाना चौक, बस स्टैंड रोड और गौशाला चौक जैसे व्यस्त इलाकों में जैसे ही कोई वाहन गुजरता है या हल्की हवा चलती है, पूरा क्षेत्र धूल के गुबार से भर जाता है. सुबह से देर शाम तक यही स्थिति बनी रहती है, जिससे लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

टूटी सड़कें और सफाई की कमी से बढ़ी समस्या

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई सड़कें लंबे समय से जर्जर हैं. सड़क की ऊपरी परत टूट जाने से मिट्टी और धूल लगातार उड़ रही है.

लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की ओर से नियमित सड़क सफाई और पानी के छिड़काव की व्यवस्था प्रभावी ढंग से नहीं की जा रही है. नतीजतन धूल लगातार हवा में फैल रही है और पूरे शहर का वातावरण प्रभावित हो रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सड़क मरम्मत और नियमित पानी के छिड़काव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

बाजारों में कारोबार पर भी पड़ रहा असर

धूल का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है.

दुकानदारों का कहना है कि दिनभर दुकान में रखे सामान पर धूल जम जाती है. उन्हें बार-बार सफाई करनी पड़ती है, लेकिन कुछ ही समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है.

धूल भरे माहौल के कारण कई ग्राहक भी खरीदारी करने से बचते हैं. इससे बाजार की रौनक और छोटे व्यापारियों की आमदनी दोनों प्रभावित हो रही हैं.

बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए बढ़ा स्वास्थ्य जोखिम

धूल का सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों पर दिखाई दे रहा है.

बाइक और साइकिल से आने-जाने वाले लोग आंखों में जलन, नाक में खुजली, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी की शिकायत कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि घर पहुंचते-पहुंचते उनके कपड़े, चेहरा और बाल पूरी तरह धूल से भर जाते हैं.

यह स्थिति रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

धूल के महीन कण फेफड़ों तक पहुंचकर अस्थमा, एलर्जी, लगातार खांसी, आंखों में संक्रमण और सांस संबंधी अन्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. मौसम में बदलाव के कारण पहले से ही सर्दी-खांसी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में धूल प्रदूषण लोगों की परेशानी को और गंभीर बना सकता है.

विशेषज्ञ लोगों को मास्क का उपयोग करने, पर्याप्त पानी पीने और आंखों में लगातार जलन होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दे रहे हैं.

नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद की सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं है.

कई स्थानों पर सड़क किनारे जमा कचरा सूखने के बाद धूल बनकर हवा में उड़ने लगता है. लोगों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद केवल औपचारिक कार्रवाई होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते.

यही वजह है कि हर साल गर्मी और बरसात के बीच के मौसम में धूल की समस्या फिर से गंभीर रूप ले लेती है.

सामाजिक संगठनों ने की ठोस कार्रवाई की मांग

शहर के कई सामाजिक संगठनों ने इस समस्या को जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है.

उन्होंने नगर प्रशासन से नियमित सड़क सफाई, पानी का छिड़काव, टूटी सड़कों की मरम्मत और बेहतर कचरा प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं.

Madhapura News: अब लोगों को आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष धूल की समस्या सामने आती है, लेकिन समाधान नहीं निकलता.

लोगों की मांग है कि नगर परिषद नियमित सफाई अभियान चलाए, प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव सुनिश्चित करे और खराब सड़कों की जल्द मरम्मत कराए. उनका मानना है कि यदि इन बुनियादी व्यवस्थाओं पर समय रहते ध्यान दिया जाए तो शहर को धूल प्रदूषण से काफी राहत मिल सकती है.

अब शहरवासियों की निगाहें नगर परिषद और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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By Aman Kumar

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