Madhepura News: मधेपुरा शहर की सड़कों पर इन दिनों सबसे बड़ी परेशानी ट्रैफिक नहीं, बल्कि उड़ती धूल बन गई है. सुबह घर से निकलते ही लोगों का सामना धूल के गुबार से होता है और रात तक यही स्थिति बनी रहती है. मुख्य सड़कें हों या मोहल्लों की गलियां, हर जगह धूल की मोटी परत लोगों की सांस, सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रही है. राहगीरों से लेकर दुकानदारों तक सभी परेशान हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है.
धूल का असर अब सिर्फ असुविधा तक सीमित नहीं रह गया है. व्यापार प्रभावित हो रहा है, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है और लोग लगातार प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
शहर की सड़कें बनीं धूल का गुबार
कॉलेज चौक, थाना चौक, बस स्टैंड रोड, गौशाला चौक सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों और विभिन्न वार्डों की सड़कों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है.
स्थानीय लोगों के अनुसार कई सड़कें टूटी हुई हैं. जैसे ही कोई वाहन गुजरता है या हल्की हवा चलती है, धूल का गुबार पूरे इलाके में फैल जाता है. सुबह से लेकर देर शाम तक यही स्थिति बनी रहती है.
लोगों का कहना है कि लंबे समय से नियमित सड़क सफाई और पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं होने के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं.
दुकानदारों का कारोबार भी हो रहा प्रभावित
धूल का असर बाजारों में भी साफ दिखाई दे रहा है. दुकानदारों का कहना है कि दिनभर दुकान में रखे सामान पर धूल जम जाती है. उन्हें कई बार सफाई करनी पड़ती है, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर वही स्थिति हो जाती है.
ग्राहक भी धूल भरे माहौल में खरीदारी करने से बचते हैं. इससे छोटे व्यापारियों की बिक्री प्रभावित हो रही है और रोजमर्रा के कारोबार पर असर पड़ रहा है.
राहगीरों और बच्चों के लिए बढ़ी मुश्किल
धूल से सबसे ज्यादा परेशानी पैदल चलने वालों, स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है.
बाइक और साइकिल से यात्रा करने वाले लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है. कई लोगों का कहना है कि घर पहुंचते-पहुंचते उनके कपड़े और चेहरा पूरी तरह धूल से भर जाते हैं.
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा सीधा असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. अस्थमा, एलर्जी, लगातार खांसी और आंखों में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
मौसम में बदलाव के कारण पहले से ही सर्दी-खांसी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में धूल प्रदूषण लोगों की परेशानी को और गंभीर बना सकता है.
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद की सफाई व्यवस्था प्रभावी नहीं है. नियमित रूप से न तो सड़कों की सफाई हो रही है और न ही पानी का छिड़काव कराया जा रहा है.
कई जगह सड़क किनारे जमा कचरा सूखने के बाद धूल बनकर हवा में उड़ने लगता है. लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद केवल औपचारिक कार्रवाई होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं दिखती.
सामाजिक संगठनों ने भी जताई चिंता
शहर के सामाजिक संगठनों ने धूल की समस्या को जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है. उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
संगठनों ने नगर प्रशासन से नियमित सड़क सफाई, पानी का छिड़काव, टूटी सड़कों की मरम्मत और बेहतर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था लागू करने की मांग की है.
Madhepura News: लोगों की मांग, अब जमीन पर दिखे कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल धूल की समस्या सामने आती है, लेकिन समाधान नहीं होता. अब शहरवासियों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम चाहिए.
लोगों का मानना है कि यदि नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और सड़क मरम्मत का काम समय पर शुरू किया जाए तो धूल की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. अब निगाहें नगर परिषद और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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