मधेपुरा में PAT-19 शोधार्थियों का मूल्यांकन महीनों से लंबित, कुलाधिपति से हस्तक्षेप की मांग

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) में PAT-19 के शोधार्थियों का मूल्यांकन महीनों से लंबित है. वाम छात्र संगठन AISF ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक देरी और अव्यवस्था की शिकायत की है. शोधार्थियों का भविष्य अधर में लटका है.

मधेपुरा से रिपोर्ट

BNMU Madhepura News: भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा में PAT-19 के लगभग एक दर्जन शोधार्थियों का शोध मूल्यांकन महीनों से लंबित होने का मामला सामने आया है. वाम छात्र संगठन AISF के पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कुलाधिपति सह राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में कथित लेटलतीफी और प्रशासनिक अव्यवस्था की शिकायत की है. उनका आरोप है कि एग्जाम बोर्ड की बैठक का हवाला देकर शोध मूल्यांकन प्रक्रिया रोकी गई है, जिससे शोधार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.

कुलाधिपति को भेजा गया शिकायत पत्र

डॉ. राठौर ने अपने पत्र में कहा है कि विश्वविद्यालय का दायित्व छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है, लेकिन BNMU में लंबे समय से प्रशासनिक देरी के कारण शोधार्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

उनका दावा है कि PAT-19 के जिन शोधार्थियों की छह वर्ष की अवधि समाप्त हो चुकी थी, उन्हें विश्वविद्यालय ने 19 जनवरी 2026 को जारी पत्र के माध्यम से UGC Regulation 2016 के प्रावधानों के तहत छह माह की अवधि विस्तार के लिए आवेदन और 2000 रुपये अतिरिक्त शुल्क जमा करने का निर्देश दिया था.

सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद भी फाइल लंबित

डॉ. राठौर के अनुसार, संबंधित शोधार्थियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर शुल्क जमा किया, विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवेदन अग्रसारित कराया और अकादमिक शाखा में आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए.

इसके बाद उन्होंने शोध कार्य पूरा कर प्री-सबमिशन और थीसिस मूल्यांकन के लिए फाइल भी जमा कर दी, लेकिन कई महीनों से फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही है.

उनका आरोप है कि अकादमिक शाखा में यह कहकर फाइल रोकी गई है कि एग्जाम बोर्ड की बैठक के बिना शोध मूल्यांकन संभव नहीं है.

एग्जाम बोर्ड बैठक की आवश्यकता पर सवाल

पत्र में यह भी कहा गया है कि संबंधित विषय पर अकादमिक काउंसिल से पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, इसलिए एग्जाम बोर्ड की बैठक को अनिवार्य बताना उचित नहीं है.

डॉ. राठौर का दावा है कि शोधार्थी लगातार अकादमिक शाखा और परीक्षा विभाग के बीच चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा.

उनके अनुसार, अकादमिक शाखा मामले को परीक्षा विभाग का विषय बता रही है, जबकि परीक्षा विभाग इसे अकादमिक शाखा के स्तर पर सुलझाने की बात कह रहा है.

बहाली प्रक्रिया पर भी असर पड़ने का दावा

डॉ. राठौर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की देरी के कारण कई शोधार्थी बिहार में चल रही नियुक्ति प्रक्रियाओं में आवेदन करने से वंचित रह गए.

उनका कहना है कि थीसिस मूल्यांकन समय पर नहीं होने के कारण भविष्य में होने वाली स्थायी नियुक्तियों में भी इन शोधार्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.

उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यशैली का गंभीर उदाहरण बताते हुए कहा कि समय पर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद शोधार्थियों की फाइल लंबित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है.

BNMU Madhepura News: कुलाधिपति और कुलपति से हस्तक्षेप की मांग

डॉ. राठौर ने कुलाधिपति सह राज्यपाल से मांग की है कि मामले में विशेष हस्तक्षेप कर एग्जाम बोर्ड की बैठक जल्द आयोजित कराई जाए, या आवश्यक होने पर शोधार्थियों की थीसिस का मूल्यांकन बिना और देरी के आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाए.

उन्होंने बताया कि इस संबंध में कुलपति को भी अलग से पत्र लिखकर लंबित फाइलों को शीघ्र आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है.

खबर लिखे जाने तक भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. राठौर द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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