नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के बाद लोग लौट रहे हैं सामान्य जीवन में

मधेपुरा : पूरे बिहार में पूर्णत: शराब बंदी से एक ओर जहां एक स्वच्छ सुंदर व प्रगतिशील बिहार के निर्माण का सपना साकार होता दिख रहा है. वहीं सरकार का यह महत्वपूर्ण फैसला जिले के बहुआयामी विकास में भी मददगार साबित हो रहा है. शराबबंदी में जिले में आम जन व प्रबुद्ध जन बढ़-चढ़ कर […]

मधेपुरा : पूरे बिहार में पूर्णत: शराब बंदी से एक ओर जहां एक स्वच्छ सुंदर व प्रगतिशील बिहार के निर्माण का सपना साकार होता दिख रहा है. वहीं सरकार का यह महत्वपूर्ण फैसला जिले के बहुआयामी विकास में भी मददगार साबित हो रहा है. शराबबंदी में जिले में आम जन व प्रबुद्ध जन बढ़-चढ़ कर की भागीदारी निभा रहे हैं.

जिले में नशे के आदी हो चुके लोग अब अपनी आदत से समझौता कर धीरे धीरे आम जिंदगी की ओर लौटने लगे हैं. सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में नशा के आदी हो चुके लोग नशा सेवन से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए इलाज के लिए आ रहे है. ऐसे लोगों में अब अप्रत्याशित परिवर्तन से समाज को नयी दिशा मिल रही है. नशा मुक्ति केंद्र में इलाजरत लोग सरकार के फैसले को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि यह आम जनों के हित में उठाया गया सराहनीय कदम है.

नशा मुक्ति केंद्र में सेवा प्रदान कर रही एएनएम नीलम भारती ने बताया कि अब तक इस केंद्र पर 21 लोग भरती हो चुके हैं. इनमें 17 लोग अपना इलाज करवा कर सामन्य जिंदगी की ओर लौट चुके है. चार लोग इस केंद्र पर इलाजरत है. इसमें शुक्रवार को दो मरीज जिनमें एक कुमारखंड से और एक मुरलीगंज प्रखंड से हैं भरती हुए.

नशा मुक्ति केंद्र में हैं 20 बेड
नशा मुक्ति केंद्र में 20 बेड हैं. यहां मरीजों को सरकार की ओर से बेहतर सुविधा प्रदान की जाती है. एएनएम व डॉक्टरों की निगरानी में नशा के आदि हो चुके मरीजों की बेहतर देखभाल की जाती है. केंद्र में मरीजों को मुफ्त भोजन की व्यवस्था है. साफ सफाई के साथ मरीजों के मनोरंजन के लिए टीवी की भी व्यवस्था की गयी है.
आम जनों के हित में है पूर्णत: शराब बंदी . सदर अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रहे सदर प्रखंड के नवटोलिया वार्ड नंबर एक, वार्ड नंबर 13, वार्ड नंबर 20, मुरलीगंज, कुमारखंड निवासी ने बताया कि सरकार का यह कदम सर्वजन हिताय वाला है. नशा के कारण आये दिन समाज में कोई न कोई घटना होती रहती थी, लेकिन जब से जिले में पूर्ण शराब बंदी लागू हुआ है. आपसी विवाद में काफी कमी आयी है. लोग सुकून की सांस ले रहे हैं.
आर्थिक रूप से हो रहे मजबूत
नशा मुक्ति केंद्र में इलाजरत लोगों ने बताया नशा सेवन से कितने ही घर परिवार उजड़ गये. शराबबंदी से नशा सेवन में जो रोज खर्च होता था, अब वह पैसे बचता है. बच्चों के काम आता है. पहले जो कमाई होती थी उसमें से आधा पैसा नशा सेवन में ही खर्च हो जाता था. इस कारण परिवार में रोज झगड़ा होता था. बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा था, लेकिन अब सारा पैसा बच रहा है. बचे पैसे बच्चों के भविष्य निर्माण में काम आ रहा है. इलाजरत लोगों ने बताया नशा छोड़ने के बाद कमजोरी, नींद नहीं आना, मन विचलित होना आदि शिकायत के बाद इस केंद्र पर आ कर इलाजरत हैं और अब राहत महसूस हो रही है. एक नई उम्मीद की किरण दिख रही है.
नशा मुक्ति केंद्र में इलाजरत लोगों ने बताया कि सरकार के इस फैसले ने लोगों की जिंदगी ही बदल डाली है. इस बात से खुशी मिल रही है कि नशा सेवन से जहां हमरा मन बेचैन रहता था, अब राहत की सांस ले रहा हूं. इस बात से अप्रत्याशित खुशी मिल रही है कि अब जो कमाउंगा परिवार के भरण पोषण पर खर्च करूंगा. परिवार के विकास की गति जो धीमी पड़ गयी थी, अब परिवार आगे बढ़ेगा और बिहार के गौरव में वृद्धि होगी. एक नशा मुक्त समाज में सांस लेकर हमारे बच्चे देश के बेहतर भविष्य के निर्माण में अहम भूमिका निभायेंगे.

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