उदासीनता . कचरा प्रबंधन हो या अतिक्रमण, हर जगह है बेतरतीबी

कब संवरेगी मधेपुरा की सूरत मधेपुरा में भी शहर विकास के नाम पर अरबों रुपये खर्च हो चुके हैं और करोड़ों हो रहे हैं, लेकिन शहर की सूरत संवरने का नाम नहीं ले रही. शहर में कचरा प्रबंधन की बात हो या सड़क पर अतिक्रमण की, हर जगह बेतरतीबी दिखायी देती है. रही सही कसर […]

कब संवरेगी मधेपुरा की सूरत

मधेपुरा में भी शहर विकास के नाम पर अरबों रुपये खर्च हो चुके हैं और करोड़ों हो रहे हैं, लेकिन शहर की सूरत संवरने का नाम नहीं ले रही. शहर में कचरा प्रबंधन की बात हो या सड़क पर अतिक्रमण की, हर जगह बेतरतीबी दिखायी देती है. रही सही कसर बिजली के खंभों पर जहां-तहां लटकते तार,
बीच सड़क पर लगे खंभे और जैसे-तैसे पार्किंग की गयी गाड़ियां पूरी कर देती हैं. लोग भी जैसे इन स्थितियों के आदी हो चुके हैं. रेंगती हुई गाड़ियां किसी तरह अपने गंतव्य तक पहुंच जाये या बाजार में खरीदीरी कर लौट आयें, इतने से ही संतुष्ट हो जाते हैं. स्थायी दुकानदारों द्वारा अपने सामने फुटपाथ के अतिक्रमण की वजह से सिकुड़ी रोड पर ट्रैफिक हमेशा जाम रहा करता है. लेकिन लोगों को इन स्थितियों से शायद कोई शिकायत नहीं.
मधेपुरा : शहर में कचरा का तो यह आलम है कि यत्र तत्र सर्वत्र बिखरा पड़ा है. डोर टू डोर कचरा संग्रह योजना यहां अब तक शुरू नहीं हो पायी है. हालांकि नगर परिषद सफाई के मद में खासी रकम खर्च की जा रही है. इसके बावजूद शहर की सूरत साफ नजर नहीं आती. सड़कों के किनारे कचरे का अंबार लगा रहता है.
नगर परिषद ने शहर के 15 वार्डों की सफाई की जिम्मेदारी एक स्वयं सेवी संस्था को दी है. इस संस्था को प्रत्येक माह लाखों रूपये का भुगतान भी किया जाता है. लेकिन स्वयं सेवी संस्था सफाई के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है. शहर के मुख्य बाजार में पूर्णिया गोला चौक से लेकर सुभाष चौक तक हमेशा गंदगी बनी रहती है.
मधेपुरा होटल के समीप से गुजरने पर लोगों की सुबह खराब हो जाती है. बैंक रोड में भी नियमित सफाई नहीं हो रही है. कचरे पर विचरते सुअरों के झुंड और बदबू के कारण लोग दूर से ही निकल जाते हैं. सर्किट हाउस के ठीक सामने कचरा स्थल बना दिया गया है. और तो और शहर के कई नामचीन होटल गंदे पानी की निकासी सड़क पर ही किया करते हैं. वहीं प्लास्टिक के डिस्पोजेबल गिलास व प्लेट भी सड़क पर ही फेंक दिये जाते हैं.
आयोग की गाइडलाइन का नहीं हो रहा पालन
पवन कुमार
आम आदमी से अगर गलती हो जाये तो उसे गलती के अनुसार परिवार, समाज और कानून सजा देता है. वहीं इसके उलट अगर प्रशासन से अगर कोई गलती हो जाये तो पूरा महकमा इस गलती पर परदा डालने में लग जाता है. आम तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये से यह स्पष्ट होता है कि उनसे कोई गलती हो ही नहीं सकती. कुमारखंड प्रखंड के इसराइन बेला पंचायत के वार्ड संख्या तीन में मतदान केंद्र के लिए स्थान चिह्नित करते समय और चुनाव आयोग के दिशा निर्देश की अवहेलना का मामला सामने आया है.
इस मामले में निर्वाचन आयोग का निर्देश: मतदाता और उनके घर से मतदान केंद्र की दूरी के बारे में राज्य निर्वाचन आयोग नें पंचायत चुनाव 2016 के लिये गाइड लाइन जारी की है. आयोग ने यह निर्देश दिया है कि बूथों की स्थापना के समय यह ध्यान रखा जाय कि बूथों की दूरी किसी भी परिस्थिति में दो किलोमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए. लेकिन आयोग के इस गाइड लाइन का असर कुमारखंड प्रखंड के इसराइन बेला पंचायत क्षेत्र में बूथों की स्थापना करने में कतई नहीं दिख रहा है.
मतदान केंद्र की दूरी का यह है हाल : इसराइन बेला पंचायत के वार्ड संख्या दो एवं तीन के बूथ संख्या 247 एवं 248 को पूर्व मुखिया के घर से एक सौ मीटर के अंदर होने के कारण स्थानांतरित किया गया. जबकि इस वार्ड के करीब ही वार्ड संख्या चार में सरकारी मनरेगा भवन या पीएचसी की जमीन होने के बावजूद तीन किमी दूर बूथ संख्या 246 के साथ इन दोनों बूथों को टैग कर दिया गया.
कहते हैं मतदाता : इसके बारे में जब 483 मतदाताओं ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष आवेदन दे कर कहा कि तीन किमी की दूरी के कारण वृद्ध, दिव्यांग या महिला मतदाताओं का वोट गिराना संभव नही होगा तो सचिव ने अपने पत्रांक 1553 दिनांक 09-03-2016 को डीएम सह जिला निर्वाचन अधिकारी से बूथ की दूर की बिंदु पर जांच करा कर शीघ्र प्रतिवेदन भेजने का आग्रह किया. इस आलोक में कुमारखंड के बीडीओ ने 22 मार्च को जांच रिपोर्ट समर्पित कर बूथ की दूरी ढाई किमी होने की बात स्वीकार की.
मतदाताओं ने दी अनशन की चेतावनी: कुमारखंड में प्रथम चरण में ही 24 अप्रैल को ही मतदान होना है. इस बाबत वरीय अधिवक्ता सह इसराइन बेला पंचायत के निवासी जवाहर झा, राजेश कुमार झा, प्रेमा देवी, सोनी देवी, मंजू देवी, मनोज कुमार झा, बेबी देवी, संजू कुमार, विमल देवी, अमरेंद्र झा, राजन झा, शीलू देवी आदि सहित सैकड़ों मतदाताओं ने पत्र लिख कर बीडीओ की रिपोर्ट को आयोग के पास नहीं भेजने और बीडीओ पर जांच प्रतिवेदन बदलने के लिए दवाब डालने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने आवेदन में पांच अप्रैल तक जांच प्रतिवेदन राज्य निवार्चन आयोग को नहीं भेजने पर छह अप्रैल से जिला निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय के समक्ष 247 व 248 के मतदाता अपने अधिकार की रक्षा के लिए आमरण अनशन पर बैठने की बात कही है.
कहते हैं जिलाधिकारी: जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम मो सोहैल ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है. उन्होंने बीडीओ को जिम्मेदारी से कार्य नहीं करने के कारण स्पष्टीकरण पूछने की बात कही. उन्होंने जिला पंचायती राज पदाधिकारी की रिपोर्ट के बाद ही मामला राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया जायेगा.

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