– छात्र-छात्राओं को दिलाया उनके जीवन से प्रेरणा लेने की शपथ मधेपुरा. बाबू वीर कुंवर सिंह के 249 वीं जयंती पर 23 अप्रैल को स्थानीय ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय स्थित परीक्षा भवन सभागार में उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी. महाविद्यालय प्राचार्य प्रो डॉ कैलाश प्रसाद यादव ने मौके पर उपस्थित छात्र-छात्राओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने एवं उनके अदय्म देशभक्ति के जज्बे को आत्मसात करने की शपथ दिलाया. उन्होंने कहा कि वीर कुंवर सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर राजघराने में हुआ था. जब 1857 की क्रांति का बिगुल बजा. तब उनकी उम्र 80 वर्ष थी. जिस उम्र में लोग लाठी का सहारा लेते हैं. आराम की तलाश करते हैं. उस उम्र में उन्होंने तलवार उठाया. अंग्रेजों की विशाल फौज के छक्के छुड़ा दिये. उन्होंने छापामार युद्ध की नीति अपनाकर अंग्रेज़ों को कई बार धूल चटाया. उनके जीवन का सबसे प्रेरक और रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रसंग है की जब वे अपनी सेना के साथ गंगा नदी पार कर रहे थे. उसी दौरान अंग्रेज़ों की एक गोली उनके दाहिने हाथ में लगी. गोली का ज़हर शरीर में न फैले. इसके लिए अपनी ही तलवार से अपना हाथ काट कर गंगा नदी में अर्पित कर दिया. ऐसा बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण इतिहास में विरले ही देखने को मिलता है. महाविद्यालय परीक्षा नियंत्रक डॉ कुमार गौरव ने कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह ने सिखाया की देशभक्ति, साहस और मातृभूमि की रक्षा के लिए उम्र कभी कोई बाधा नहीं होती. उनके भीतर का जज़्बा युवाओं से भी कहीं बढ़कर था. हमें उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर देश की एकता एवं अखंडता की रक्षा के लिए तत्पर रहना चाहिये. मौके पर डॉ विजय कृष्णा, डॉ मिंटू कुमार मेनन, डॉ अशोक कुमार अकेला, डॉ मनोज कुमार ठाकुर, डॉ मनीष कुमार, सुजीत कुमार झा, डॉ राकेश कुमार, बड़ा बाबू नारायण ठाकुर, धीरेंद्र ठाकुर, दिनेश यादव, प्रणव कुमार ठाकुर, बबलू यादव, सुनील यादव, गणेश यादव, भरत यादव, शंभू यादव, सुशील कुमार सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
बाबू वीर कुंवर सिंह के 249 वीं जयंती पर टीपी कॉलेज प्राचार्य ने किया पुष्पांजलि अर्पित
उम्र 80 वर्ष थी. जिस उम्र में लोग लाठी का सहारा लेते हैं. आराम की तलाश करते हैं.
