लापरवाही . शंकरपुर में बेहरारी पंचायत में 70 आरडी सिंहेश्वर शाखा नहर टूटा

सैकड़ों एकड़ में लगी फसल जलमग्न बेहरारी पंचायत में बुधवार की देर रात 70 आरडी सिंहेश्वर शाखा नहर के टूटने से सैकड़ों एकड़ गेहूं, मक्का सहित अन्य फसल जलमग्न हो गयी है. नहर में पानी का दबाव बढने के कारण देर रात बेहरारी टोला के समीप नहर का पूर्वी बांध टूट कर बह गया. कुछ […]

सैकड़ों एकड़ में लगी फसल जलमग्न

बेहरारी पंचायत में बुधवार की देर रात 70 आरडी सिंहेश्वर शाखा नहर के टूटने से सैकड़ों एकड़ गेहूं, मक्का सहित अन्य फसल जलमग्न हो गयी है. नहर में पानी का दबाव बढने के कारण देर रात बेहरारी टोला के समीप नहर का पूर्वी बांध टूट कर बह गया. कुछ ही घंटों में नहर का पानी आसपास के खेतों में लगी फसल को बारबाद कर दिया.
शंकरपुर : प्रखंड के बेहरारी पंचायत में नहर में पानी का दबाव बढने के कारण देर रात बेहरारी टोला के समीप नहर का पूर्वी बांध टूट कर बह गया. कुछ ही घंटों में नहर का पानी आसपास के खेतों में लगी फसल को बारबाद कर दिया. नहर टूटने की सूचना शंकरपुर अंचलाधिकारी को ग्रामीणों ने दी. लेकिन, गुरुवार की देर संध्या तक अंचलाधिकारी घटना स्थल पर नहीं पहुंचे थे. हालांकि, सैकड़ों ग्रामीणों के अथक प्रयास से तत्काल टूटे हुए बांध को बांध दिया गया है. लेकिन, पानी डिस्चार्ज होने के बाद पुन: क्षतिग्रस्त बांध के टूटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.
जानकारी अनुसार बेहरारी पंचायत के वार्ड नंबर बेहरारी टोला के समीप बुधवार के रात्रि नहर का पूर्वी किनारा टूट गया. नहर टूटने की भनक रात्रि में ही स्थानीय लोगों को लग गया. नहर टूटने की जानकारी तत्काल सिचाई विभाग के पदाधिकारी को दूरभाष से देते हुए ग्रामीणों ने टूटे हुए नहर को बांधने का प्रयास शुरू किया और अंततः टूटे हुए नहर को बांधने में सफलता पा लिया गया.
नहर टूटने की जानकारी देते हुए स्थानीय किसान गजेंद्र यादव, चंदेश्वरी यादव, जगदीश यादव, अनिल यादव, वासुदेव यादव, वालेश्वर यादव, विजेंद्र यादव, जगदीश चौधरी सहित कई किसानों ने बताया की नहर का किनारा पिछले कई वर्षों से क्षति ग्रस्त है. फिर भी बिना नहर के किनारा का मरम्मत कराये नहर में ज्यादा पानी का डिस्चार्ज कर दिया जाता है. जिस कारण क्षतिग्रस्त जगह पर पानी ओवरफ्लो होकर नहर टूटा है. ग्रामीण स्तर पर तो नहर को तो बांध दिया गया है.
लेकिन नहर का क्षति ग्रस्त जगह पर अगर जल्द पानी का डिस्चार्ज बंद कर मरम्मत नहीं हुआ तो फिर नहर टूटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.
पिछले साल भी इसी जगह इसी समय में नहर टूटा था. जिसमें सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो कर बर्बाद हो गया था. जिसमें किसानों को फसल क्षति का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है. मालूम हो की नहर टूटने के बाद पानी का बहाव तेज होने के कारण पक्की सड़क भी टूट गया है. जिस कारण बेहरारी मुख्य सरक से लोगों का आवागमन भी ठप हो गया है.
नहर टूटने की जानकारी अंचलाधिकारी गियान प्रकाश सेराफिम को भी ग्रामीणों द्वारा दी गयी है. समाचार लिखे जाने तक वह वहां नहीं पहुंच थे.
मुरलीगंज डिवीजन में करोड़ों का है गड़बड़झाला . मुरलीगंज नहर डिवीजन में 67 करोड़ की राशि से कार्य होना था. काम टुकड़ों में पेटी कांट्रैक्टर को दे दिया गया. अगर राज्य सरकार की सोच के अनुसार पचास फीसदी कार्य भी हुआ होता तो सचमुच नयी कोसी का निर्माण हो जाता लेकिन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी और संवेदकों ने इस योजना को पलीता लगा कर अपनी झोली भर ली.
नतीजा यह है कि नहरों की स्थिति में जरा सा ही फर्क आया है. अब भी टूटे नहर से पानी का रिसाव आम बात है. जगह – जगह नहर के तटबंध टूटने की सूचना मिलती रहती है.

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