मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के सभागार में शुक्रवार को मद्य निषेध अभियान के जिला स्तरीय की बैठक की गयी. बैठक की अध्यक्षता मो सोहैल ने किया. बैठक में मद्य निषेद को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये.
बैठक में एक अप्रैल से देसी शराब की बंदी के सफल संचालन को लेकर रणनीती बनायी गयी. जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के सभी विद्यालयों के बच्चों के अभिभावकों का शराब नहीं पीने का संकल्प पत्र भराया जायेगा. इसमें बच्चों के पिता के अतिरिक्त गवाह के रूप में बच्चों की माता व बच्चों से भी हस्ताक्षर करवाना है. मौके पर उन्होंने मद्य निषेध के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से कला जत्था के प्रदर्शन की समय सीमा पर चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिये. जिलाधिकारी ने कहा कि चार कला जत्था की टीम तैयार की जायेगी. कार्यक्रम निदेशालय के निर्देशानुसार तीन कला जत्था टीम द्वारा 170 पंचायतों में प्रतिदिन लोगों को जागरूक करने के लिए तीन कार्यक्रम किया जायेगा. यह 20 अप्रैल तक जारी रहेगा. बैठक में जिलाधिकारी ने पंचायत स्तर पर मद्य निषेध पर मद्य निषेध अभियान के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु ग्राम संवाद दल के सदस्यों को सक्रिय करने का निर्देश दिया.
साथ ही बैठक में महादलित, अल्पसंख्यक, निरक्षरों को तीन महीना में साक्षर करने का निर्देश दिया गया. जिसके तहत 24 फरवरी को कला भवन में विकास मित्रों, टोला सेवकों, शिक्षा स्वयं सेवकों एवं प्ररकों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया है. वहीं बैठक में पठन पाठन के पर्यवेक्षण में पंचायत स्तर पर विकास मित्रों को और प्रखंड स्तर पर प्रख्ंड समन्वयकों, केआरपी एवं जिला स्तर पर जिले के कर्मी को लगाने का निर्देश दिया गया है.
बैठक में डीएम ने कहा कि साक्षरता केंद्र के संचालन हेतु आवश्यक पठन – पाठन सामग्री मुहैया कराया जाय. मौके पर जिला आरक्षी पदाधिकारी कुमार आशीष ने बताया कि मद्य निषेद अभियान के सांस्कृतिक जत्था कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय थाना प्रभारी पूर्ण सहयोग करेंगे. मौके पर जिला उत्पाद एवं मद्य निषेद पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सर्व शिक्षा शिवशंकर राय, मुख्य कार्यक्रम समन्वयक जानेश्वर शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक मुरलीधर, एसआरजी अवधेश कुमार, महिला केआरपी लिला वती, जीविका, आशा, महिला सामख्या एवं सभी प्रखंडों के शिक्षा पदाधिकारी मौजूद थे.
