पांच कमरे, 16 विषय, 21 शक्षिक, पांच हजार छात्राएं

पांच कमरे, 16 विषय, 21 शिक्षक, पांच हजार छात्राएं सहरसा. स्त्री शिक्षा के प्रति संजीदा दिखने वाली सरकार के फेहरिस्त में महिला महाविद्यालयों की स्थितियों में क्रमिक सुधार की बात तो उठती है परंतु हकीकत कोसों दूर है. कोसी प्रमंडल में एकलौते अंगीभूत महिला महाविद्यालय की हालत दयनीय है. फरवरी 1972 में स्थापित रमेश झा […]

पांच कमरे, 16 विषय, 21 शिक्षक, पांच हजार छात्राएं सहरसा. स्त्री शिक्षा के प्रति संजीदा दिखने वाली सरकार के फेहरिस्त में महिला महाविद्यालयों की स्थितियों में क्रमिक सुधार की बात तो उठती है परंतु हकीकत कोसों दूर है. कोसी प्रमंडल में एकलौते अंगीभूत महिला महाविद्यालय की हालत दयनीय है. फरवरी 1972 में स्थापित रमेश झा महिला महाविद्यालय में वर्तमान पांच कमरों में लगभग पांच हजार छात्राएं कक्षा किस प्रकार करती होगी, इसका सहज अंदाज लगाया जा सकता है. अन्य कमरों में लैब व प्रशासनिक कार्य आदि होते हैं. इतना ही नहीं छात्रावास के आठ कमरों में 35 से अधिक छात्राएं भी रहती है. डॉ रेणु सिंह ने बताया कि वे छात्रावास सहित अन्य कमरों के लिए अपने पदस्थापन के बाद से ही चिंतित थी. अब थोड़ी सुधार हुई और विश्वविद्यालय के अधिकारियों से सहयोग का आश्वासन भी मिला है. मालूम हो कि रमेश झा महिला महाविद्यालय छात्राओं के लिए 16 विषयों में कक्षाएं आयोजित करवाता है. साथ ही यहां कार्यरत इग्नू की शाखा में इतिहास और हिंदी से एमए की भी सुविधा उपलब्ध है. वर्तमान में कॉलेज की कक्षाओं के लिए सिर्फ 21 व्याख्याता उपलब्ध हैं. राजनीतिशास्त्र में एकमात्र शिक्षक हैं. शहर के बीचों बीच स्थित लंबे-चौड़े भूभाग में स्थित कॉलेज में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि भी है. महिलाओं के शिक्षा हेतु यह एक आदर्श स्थान रखते हुए भी पूर्णत: उपेक्षित पड़ा है. पूर्ववर्ती राजनीतिज्ञों ने भी इसमें कोई गंभीरता नहीं दिखलाई.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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