नतीजा यह है कि लोग छोटे-छोटे मामलों को सुलझाने के लिए सहरसा जाना पड़ता है और यहां मामूली काम में भी कम से कम तीन दिन का समय लगता है. हालांकि मधेपुरा जिला में सर्वे कोर्ट के जरिये होने वाले कई कार्य बंद कर दिये गये हैं. मधेपुरा जिला के जमीन संबंधित पुराने कागजात सर्वे कार्यालय में हैं. नया कागजात त्रुटिपूर्ण होने के कारण जमीन के कागज की सत्यता के लिए लोग पुराने कागज पर ही निर्भर हैं.
सर्वे कोर्ट सहरसा में, लंबित हैं भू-विवाद के मामले
मधेपुरा/ उदाकिशुनगंज: जिले में सर्वे कोर्ट के कार्यरत नहीं रहने के कारण भूमि विवाद के कई मामले वर्षो से अनसुलङो हैं. कई बार सर्वे कोर्ट की शुरुआत जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल में भी की गयी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे सहरसा स्थानांतरित कर दिया गया. नतीजा यह है कि लोग छोटे-छोटे मामलों को सुलझाने […]

मधेपुरा/ उदाकिशुनगंज: जिले में सर्वे कोर्ट के कार्यरत नहीं रहने के कारण भूमि विवाद के कई मामले वर्षो से अनसुलङो हैं. कई बार सर्वे कोर्ट की शुरुआत जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल में भी की गयी, लेकिन कुछ ही समय बाद इसे सहरसा स्थानांतरित कर दिया गया.
सर्वे कोर्ट के कार्य: सर्वे कोर्ट में भूमि की पैमाइश से संबंधित वाद का निपटारा किया जाता है. किसी की जमीन का खतियान किसी और के नाम खुलने या नक्शे पर मौजूद खेसरा किसी अन्य के नाम से नामांतरण होने, मालगुजारी का भुगतान नहीं करने या अन्य कारणों से जमीन बिहार सरकार द्वारा नीलाम किये जाने संबंधी वाद आदि का निष्पादन सर्वे कोर्ट के जरिये ही किया जाता है.
कोर्ट कभी यहां तो कभी सहरसा : जिले के उदाकिशुनगंज में सर्वे कोर्ट की स्थापना 1985 में की गयी थी, लेकिन तीन माह बाद ही उक्त कोर्ट को स्थानांतरित कर सहरसा ले जाया गया. जिले के विभिन्न गांवों में व्याप्त भूमि विवाद का निबटारा कराने के लिए यहां के लोगों को 67 से 89 किमी दूर सहरसा जाना पड़ता था. लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ शारीरिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.2005 में सप्ताह में दो दिन कैंप सर्वे कोर्ट स्थानीय डाक बंगला भवन में शुरू तो किया गया, लेकिन फिर वहीं हाल हुआ और 2008 में पुन: कोर्ट स्थानांतरित कर सहरसा ले जाया गया. एक बार फिर सहरसा से सर्वे कोर्ट अनुमंडल मुख्यालय लाया गया और कोसी परियोजना की आइबी में चलाया गया, लेकिन चंद माह के बाद ही पुन: विभागीय पदाधिकारी कोर्ट सहरसा लेकर चले गये. गत तीन वर्ष पूर्व सहरसा से कोर्ट स्थानांतरित कर मधेपुरा लाया गया. यहां काम शुरू हुआ, लेकिन दफा 106 के तहत अनियमितता पाये जाने पर फिर इसे बंद कर दिया गया.