नाम बड़े और दर्शन छोटे: अनुमंडलीय अस्पताल में पीएचसी की तरह भी नहीं मिलती है सुविधा

उदाकिशुनगंज : विकास में एक साल पहले अनुमंडलीय अस्पताल के रूप में कड़ी जुड़ा. उस वक्त लगा कि अनुमंडलीय अस्पताल के चालू होने से इलाके के लोगों को फायदा होगा. इलाके के लोग इसे बड़ा वरदान के रूप में देख रहे थे. लोगों को लगा कि अस्पताल के चालू होने से अब गरीब मरीजों को […]

उदाकिशुनगंज : विकास में एक साल पहले अनुमंडलीय अस्पताल के रूप में कड़ी जुड़ा. उस वक्त लगा कि अनुमंडलीय अस्पताल के चालू होने से इलाके के लोगों को फायदा होगा. इलाके के लोग इसे बड़ा वरदान के रूप में देख रहे थे.

लोगों को लगा कि अस्पताल के चालू होने से अब गरीब मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. यहां पर 23 दिसंबर 2017 को जब अस्पताल शुरू हो रहा था तो लोगों के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रहा था. हालांकि अस्पताल में प्रारंभिक तौर पर महज ओपीडी सुविधा शुरू की गयी है.
तत्कालीन सिविल सर्जन गदाधर पांडेय ने बताया था कि अस्पताल के लिए अभी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हुई है. जैसे ही अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति होगी. वैसे ही मरीज को इमरजेंसी एवं अन्य सुविधाओं का लाभ मिलने लगेगा. तत्कालिक तौर पर पीएचसी के डॉक्टरों से काम लिया जा रहा है.
अस्पताल को चालू हुये एक साल से अधिक का समय बित गया. यद्यपि अस्पताल अपने मूल अस्तित्व में नहीं आ पाया. इस बात से ईलाके के लोगों में बड़ा रोष है. वहीं बिना व्यवस्था के अस्पताल के चालू होने पर लोग सवाल उठा रहे है. स्थानीय जनप्रतिनिधि से भी लोगों में नाराजगी है.
आनन-फानन में शुरू हुआ अस्पताल : अस्पताल शुरू होने के चंद दिन बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिले में दौरा था. अनुमंडलीय अस्पताल को लेकर भाकपा ने उस समय आंदोलन चलाया. भाकपा नेताओं ने उस समय कहा कि अस्पताल चालू नहीं होने पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करेंगे. भाकपा नेता अल्टीमेटम को देखते हुये जिला प्रशासन ने उस समय आनन-फानन में अस्पताल चालू करा दिया.
सौ बेड का है अस्पताल : उदाकिशुनगंज में तीन करोड़ की राशि से बना अनुमंडलीय अस्पताल एक सौ बैड का है. इस अस्पताल में मरीजों की सुविधा का इंतजाम नहीं है. व्यवस्था के अभाव में बैड खाली पड़ा रहता है.
एक दशक पहले मिला अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा : उदाकिशुनगंज में वर्ष 1987 ईं में रेफरल अस्पताल बना है. जहां शुरूआती दौर में डॉक्टर, कर्मियों की प्रतिनियुक्ति हुई. यद्यपि कुछ दिन बाद अस्पताल बंद हो गया. लोगों में निराशा छा गया.
उदाकिशुनगंज के रेफरल अस्पताल को 2009 ई में अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा नीतीश कुमार की सरकार में मिला. जहां अस्पताल के लिए तीन करोड़ की राशि से भवन निर्माण का कार्य पूरा हुआ. भवन निर्माण कार्य पूर्ण होने पर 2017 के जून माह में जिला प्रशासन ने आनन फानन में शरद यादव के द्वारा अस्पताल का उदघाटन करा दिया गया. अस्पताल के चालू नहीं होने पर सवाल उठते रहे.
मरीजों को होती रही परेशानी : अनुमंडल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा नहीं रहने से गरीब मरीजों को परेशानी होता रहा. बेहतर इलाज के लिए लोगों को दूसरे जिले, राजधानी या फिर दूसरे प्रदेश का सहारा लेना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर मरीज बाहर जाकर समुचित इलाज नहीं करा पाते है.
अब जबकि अस्पताल चालू हुआ तो लोगों की उम्मीदें जगी. लेकिन आशाएं धरी की धरी रह गई. अनुमंडलीय अस्पताल एक साल पहले चालू हो गया. लोगों ने अंदेशा जताया था कि कहीं मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन अस्पताल चालू कराया है. जो अंदेशा सही निकला.
डॉक्टर व कर्मियों की नहीं हुई पोस्टिंग : अनुमंडलीय अस्पताल के लिए अलग से डॉक्टर, एएनएम, कर्मियों की पदस्थापना होना था. जहां गंभीर मरीजों का इलाज हो पाता. लेकिन डॉक्टर और कर्मियों की पदस्थापना नहीं हो पाया. महिला चिकित्सकों की भी पदस्थापना होना था. ईलाके में एक भी महिला चिकित्सक नहीं है.
शोकसभा में विद्यालय के शिक्षक रिजवाना इसराइल, हकीमुद्दीन, प्रतिभा गुप्ता, बिंदु कुमारी, पुरुषोत्तम कुमार, अमीम आलम, राजीव नंदन, संजीवनंद, उमेश प्रसाद यादव, विभा कुमारी, शुभम कुमारी बाल संसद के प्रधानमंत्री साक्षी कुमारी, उपप्रधानमंत्री गुंजन कुमारी आदि उपस्थित थी.
पूर्व विदेश मंत्री के निधन पर शोक सभा : शंकरपुर. प्रखंड मुख्यालय के शंकरपुर बाजार स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर भारतीय जनता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष सुरेश यादव की अध्यक्षता में शोक सभा आयोजित किया. मौके पर युवा प्रखंड अध्यक्ष सुदीप कुमार ठाकुर उर्फ गुड्डू, विनोद कुमार सरदार, जनार्दन दास, जय प्रकाश राम, सतीश कुमार, विजय सिंह, अरविंद राय, शिवनंदन दास आदि मौजूद थे.

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