गहराने लगा सिंचाई का संकट, किसानों में मायूसी

मधेपुरा : जिले के विभिन्न प्रखंडों में नदी, नहर व तालाब में जल के अभाव से मवेशी सहित सिंचाई सुविधा का संकट गहराता जा रहा है. गेहूं फसल की तैयारी होने के साथ ही किसानों को खेतों की सिंचाई करनी होती है. सरकार द्वारा पूर्व में करोड़ों की लागत से बना ड्रेनेज ध्वस्त हो गया […]

मधेपुरा : जिले के विभिन्न प्रखंडों में नदी, नहर व तालाब में जल के अभाव से मवेशी सहित सिंचाई सुविधा का संकट गहराता जा रहा है. गेहूं फसल की तैयारी होने के साथ ही किसानों को खेतों की सिंचाई करनी होती है. सरकार द्वारा पूर्व में करोड़ों की लागत से बना ड्रेनेज ध्वस्त हो गया है.

पहले कृषकों को इस जल भंडारण से पटवन का कार्य पूर्ण हो जाता था. यहां तक कि कोपरिया व उदाकिशुनगंज में ड्रेनेज कार्यालय का भग्नावेश ही रह गया है. धूप के कारण नदियों में पानी नहीं है.
जिले के विभिन्न प्रखंड क्षेत्र के तालाब सुख रहे हैं. मनरेगा के द्वारा बनने वाला तालाब व उसका जीर्णोधार में प्रगति संतोषजनक नहीं देखा जा रहा है. नल कूप विभाग द्वारा बनाएं गये स्टेट वोरिंग मात्र शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है. जिसका संचालन भी नहीं हो पाता है.
इस क्षेत्र के किसानों के सामने सिंचाई की संकट बनी रहती है. वक्त रहते सरकार को जल संग्रहण योजना पर बल देकर काम करने की जरूरत है जिससे भविष्य में इस संकट से निजात मिल सके.
धूल यानी बीमारी का कारक
हवा में उड़ती धूल और गेहूं के फसल की तैयारी के कारण सांस के रोगियों की शामत आ गयी है. आम तौर पर लोग धूल को गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन इसके कारण गंभीर रोग पनप सकते हैं. खास तौर पर अस्थमा के रोगियों की तकलीफ भी बढ़ जाती है. साइनस के रोगी भी परेशान रहते हैं. इन दिनों गेहूं की फसल की कटाई चल रही है. फसल तैयारी करने के दौरान उड़ने वाला महीन भूसा से भी सांस के रोगियों को बच कर रहने की जरूरत है.
बरतें सावधानी
धूप में निकलने से परहेज करें
यदि निकले तो छाता लेकर निकले
धूल से बचने के लिए नाक ढक कर रखें.
मसालेदार पदार्थ का उपयोग कम करें
ज्यादा से ज्यादा पानी पीये, ओआरएस व ग्लूकोज का सेवन करे
कच्चे आम को आग में पका कर शरबत पीये, नमक वचीनी पानी का संतृप्त घोल बना कर पीयें
मौसमी फल खाये
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