चानन गोरधोबा कोड़ासी में झरना का पानी हो रहा बेकार, नाला निर्माण की उठी मांग
चानन गोरधोबा कोड़ासी में झरना का पानी हो रहा बेकार, नाला निर्माण की उठी मांग
By Rajeev Murarai Sinha Sinha | Updated at :
दो हजार फीट नाला बनने से आत्मनिर्भर बन सकते हैं आदिवासी किसान, सालों भर रहता है जलप्रवाह
चानन. प्रखंड के कुंदर पंचायत अंतर्गत अतिसंवेदनशील आदिवासी गांव गोरधोबा कोड़ासी के पूर्वी भाग में स्थित ””आमझड़ी”” झरना प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अपना अस्तित्व खो रहा है. इस झरने से सालों भर पानी का बहाव होता है, लेकिन उचित प्रबंधन न होने के कारण यह पानी महज सौ फीट की दूरी तय करने के बाद जमीन के अंदर समा जाता है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पानी को नाला बनाकर गांव तक लाया जाए, तो यहां के किसान अन्न उगाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं.
ग्रामीणों की फरियाद व प्रशासनिक आश्वासन
गांव के पप्पू सोरेन, रत्तु सोरेन, रज्जू सोरेन, गुरुचरण सोरेन व खंडो मरांडी ने बताया कि इस झरने के पानी को गांव तक लाने के लिए लगभग दो हजार फीट लंबे नाले के निर्माण की आवश्यकता है. पहले गांव के लोग इसी झरने का पानी पीने व खाना बनाने के लिए उपयोग करते थे. आज भी गर्मी के दिनों में यह एकमात्र सहारा होता है. ग्रामीणों के अनुसार, जब भी नक्सल ऑपरेशन के दौरान कोई बड़े अधिकारी गांव आते थे, तो उनसे इसकी गुहार लगाई जाती थी. हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, लेकिन धरातल पर काम अब तक शुरू नहीं हो सका.
किसानों को होगा बड़ा लाभ
इस झरने का पानी गांव तक पहुंचने से न केवल गोरधोबा कोड़ासी बल्कि पास के गोपालपुर गांव के किसानों को भी सिंचाई में काफी मदद मिलेगी. वर्तमान में पानी का कोई उपयोग नहीं होने से यह बर्बाद हो रहा है, जबकि किसान सिंचाई के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं.
कहती हैं अधिकारी
बीडीओ प्रिया कुमारी ने बताया कि वीबी जीरामजी योजना का कार्य शुरू होने के बाद नाली का निर्माण कराया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही झरने के पानी को नाले के माध्यम से गांव तक पहुंचाया जाएगा ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद ग्रामीणों व किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके.