कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को किया भावविभोर

हिंदी दिवस पर रविवार को श्री जगदंबा हिंदी पुस्तकालय, बड़हिया में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया

बड़हिया. हिंदी दिवस पर रविवार को श्री जगदंबा हिंदी पुस्तकालय, बड़हिया में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. मौके पर मिथलेश प्रसाद सिंह, कृष्ण मोहन सिंह, सुरेश प्रसाद सिंह माधुर्य, डॉ. पुरुषोत्तम कुमार, सुधीर प्रोग्रामर, राजेंद्र राज, डॉ. नूतन कुमारी सिंह और अनिरुद्ध सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण मोहन सिंह उर्फ सरदार ने की, जबकि संचालन कवि नसीम अख्तर ने किया. कार्यक्रम के दौरान कवयित्री डॉ नूतन कुमारी सिंह की काव्य कृति “सदा-ए-दिल” का विमोचन किया गया. उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे हिंदी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया. सम्मेलन में कवियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं. सुधीर प्रोग्रामर ने हिंदी को धरती की शान बताते हुए काव्य पाठ किया. डॉ. नूतन कुमारी सिंह ने सामाजिक सरोकारों को छूती रचना सुनायी. डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने हास्य, श्रृंगार और उपनिषद के श्लोकों से श्रोताओं को प्रभावित किया. कवि राममूरत ने “ऋषि तपस्वी की यह धरती” कविता का पाठ कर लोगों का ध्यान खींचा. पुस्तकालय परिवार की ओर से सभी कवियों को फूलमाला और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में डॉ रामप्रवेश सिंह, प्रो श्रीकांत ठाकुर, राजकुमार वरैय, व्रजदेव प्रसाद शर्मा, सुनील कुमार, चंदन कश्यप, आयुष कुमार, मट्टू सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे. यह कवि सम्मेलन हिंदी की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने वाला एक यादगार अवसर साबित हुआ.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

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