तिलकुट की सोंधी खुशबू से महक रहा शहर के साथ पड़ोसी जिला

बन रहे तिलकुट के सोंधी खुशबू पड़ोस जिले के भी कोने-कोने में महक रही है

-लोगों के द्वारा अपने रिश्तेदार के यहां संदेश के रूप में भेजा जा रहा विभिन्न तरह की तिलकुट-वर्तमान में दो सौ रुपये से छह सौ रुपये तक हो रही है तिलकुट की बिक्रीलखीसराय. शहर में जगह-जगह बन रहे तिलकुट के सोंधी खुशबू पड़ोस जिले के भी कोने-कोने में महक रही है. लोग अपने-अपने कुटुंब में भी लखीसराय के तिलकुट संदेश के रूप दूर-दूर तक पहुंचा रहे हैं. शहर के विद्यापीठ चौक पुरानी बाजार एवं नयी बाजार में तिलकुट बनाया जाता है. छठ पूजा के बाद शहर में तिलकुट बनना शुरू किया जाता है जो 14 से 20 जनवरी तक बनाया जाता है. इस बीच विभिन्न तरह के घीवर, तिलकुट के साथ गुड़ का तिलवा बनाया जाता है. पिछले 20 साल से यहां यह सिलसिल जारी है.

गुड़ का तिलवा, तिलकुट के साथ ताजा व रसदार घीवर भी होता है तैयार

शहर के विद्यापीठ चौक से लेकर नया बाजार दालपट्टी तक गुड़ का तिलवा के साथ-साथ तिलकुट व घीवर तैयार कराया जाता है. बड़ी दुर्गा स्थान के सामने तिलकुट व्यवसाय बाबू लाल प्रसाद का कहना है कि वे पिछले 20 सालों से तिलकुट बनाकर पड़ोसी जिला बेगूसराय, जमुई, झाझा, अभयपुर समेत कई स्थानों के तिलकुट व्यवसाय को तिलकुट दिया जाता है. वहीं यहां पर ग्राहकों के डिमांड पर भी स्पेशल तिलकुट बनाकर दिया जाता है.

तिलवा सौ तो तिलकुट 210 से चार सौ रुपये प्रति किलो उपलब्ध

बाजार में एक सौ रुपये चीनी का तिलवा 120 रुपये प्रति किलो गुड़ का तिलवा. वहीं 220 रुपये चीनी एवं 320 रुपये प्रति किलो गुड़ का तिलकुट की बिक्री हो रही है. वहीं रसदार एवं ताजा घीवर दो सौ रुपये प्रति किलो बिक्री होती है. चार सौ प्रति किलो खस्ता तिलकुट भी मिल जाता है. 14 से 20 जनवरी तक तिलकुट की बिक्री होती है. तिलकुट के लिए एवं चीनी का पाक के साथ गुड़ का पाक बाहर से मंगाया जाता है.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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