Jamui News: एक हाथ में चप्पल, दूसरे हाथ से स्कूल ड्रेस संभालते बच्चे और सामने कीचड़ से भरा रास्ता. कहीं घुटने तक पहुंचता पानी तो कहीं सड़े पानी से उठती दुर्गंध. यह किसी बाढ़ प्रभावित इलाके का दृश्य नहीं, बल्कि सूर्यगढ़ा प्रखंड के कवादपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिवाना तक पहुंचने वाले रास्ते की मौजूदा तस्वीर है.
मानिकपुर थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या-9 में स्थित इस विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश के पानी की निकासी नहीं होने के कारण बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. मुख्य रास्ते पर करीब एक से डेढ़ फीट तक पानी जमा है. कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल चुका है. फिसलन इतनी है कि बच्चे अक्सर गिर जाते हैं. कपड़े और स्कूल बैग गंदे होने के बाद कुछ बच्चे वापस घर लौट जाते हैं.
पानी के बीच से स्कूल पहुंचने की मजबूरी
विद्यालय आने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षित रास्ते की है. जलजमाव के कारण कई बच्चे जूते-चप्पल हाथ में लेकर पानी के बीच से गुजरते हैं. स्कूल ड्रेस को ऊपर उठाकर किसी तरह विद्यालय पहुंचते हैं.
फिसलन भरे रास्ते पर हर कदम संभलकर रखना पड़ता है. बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है. ऐसे में अभिभावक भी छोटे बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं.
विद्यालय तक पहुंचने के लिए धान के खेतों के बीच बनी एक संकरी पगडंडी का भी सहारा लेना पड़ता है. करीब 200 से 300 फीट लंबे हिस्से में भी एक से डेढ़ फीट तक पानी जमा है. इससे रास्ता और जोखिम भरा हो गया है.
ग्रामीणों के अनुसार, पानी भरे इस रास्ते में सांप-बिच्छू और दूसरे जहरीले कीड़े-मकौड़ों का खतरा भी बना रहता है. ऐसे में बच्चों के लिए यह रास्ता केवल असुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा की चिंता भी पैदा कर रहा है.
225 बच्चे नामांकित, जलजमाव से उपस्थिति प्रभावित
उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिवाना में 225 बच्चे नामांकित हैं. प्रधानाध्यापक सहित आठ शिक्षक-शिक्षिकाएं यहां कार्यरत हैं. प्रधानाध्यापक पंकज कुमार ने बताया कि जलजमाव के कारण कई बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं.
विद्यालय में भवन के नाम पर चार कमरे हैं. रसोईघर और कार्यालय की अलग व्यवस्था नहीं है. इन्हीं कमरों और बरामदे में बच्चों की पढ़ाई के साथ स्टोर और मध्याह्न भोजन से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होती हैं.
ऐसे में विद्यालय तक पहुंचने वाला रास्ता खराब होने से समस्या केवल आने-जाने तक सीमित नहीं रहती. बच्चों की उपस्थिति और नियमित पढ़ाई भी प्रभावित होती है.
स्कूल परिसर में चापाकल और बोरिंग, पानी की गुणवत्ता पर चिंता
जलजमाव का असर विद्यालय की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. परिसर में एक चापाकल और बोरिंग है, लेकिन चारों तरफ पानी जमा होने के कारण पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बनी हुई है.
प्रधानाध्यापक के अनुसार, मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल पेयजल और भोजन बनाने में किया जाता है. जलजमाव वाले इलाके में पेयजल की स्वच्छता को लेकर यह स्थिति बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी चिंता का विषय बनी हुई है.
परीक्षा की वजह से बच्ची को लेकर स्कूल पहुंचीं मां
जलजमाव के बीच अभिभावकों की चिंता भी साफ दिखाई देती है. अभिभावक सावित्री कुमारी अपनी बच्ची को परीक्षा दिलाने के लिए विद्यालय लेकर पहुंचीं.
उन्होंने बताया कि परीक्षा नहीं होती तो वह इस रास्ते से अपनी बच्ची को भेजने में डरती हैं. उनके अनुसार, जलजमाव वाले पानी से गुजरने के कारण बच्चों के पैरों में संक्रमण की शिकायत भी हो रही है.
यह स्थिति बताती है कि जलजमाव का असर केवल विद्यालय की उपस्थिति पर नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और अभिभावकों के भरोसे पर भी पड़ रहा है.
Jamui News: ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा सुरक्षित रास्ता
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है. उनका कहना है कि लंबे समय से जलजमाव की समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
ग्रामीण चाहते हैं कि विद्यालय तक आने-जाने के लिए ऐसा रास्ता बनाया या व्यवस्थित किया जाए, जिससे बारिश के दौरान भी बच्चे और शिक्षक सुरक्षित तरीके से विद्यालय पहुंच सकें. साथ ही जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करने की भी जरूरत बतायी जा रही है.
फिलहाल 225 बच्चों वाले इस विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता ही सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. जलजमाव कब तक रहेगा और बच्चों को इससे कब राहत मिलेगी, यह स्थानीय प्रशासन की ओर से उठाये जाने वाले कदम पर निर्भर करेगा.
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