जिला विधिक संघ के अधिवक्ताओं के बीच गतिरोध जारी

सुबोध कुमार ने कहा कि विगत तीन दिसंबर को कुछ अधिवक्ताओं द्वारा अवैध रूप से प्रपत्र बिक्री कार्यालय में ताला लगाकर अवैध तरीके से प्रपत्र बिक्री किया जाने लगा. जिसके बाद पूरे बिहार के विधिक संघ की सदस्यता को मान्यता दिये जाने वाला बिहार काउंसिल के द्वारा नौ लोगों को कारणपृक्षा नोटिस जारी किया जाता है .

निवर्तमान महासचिव ने बुधवार को अधिवक्ताओं की आम सभा को बताया अवैध

बुधवार को अधिवक्ताओं की आमसभा में महासचिव को किया गया था पदच्युत

लखीसराय. जिला विधिक संघ लखीसराय में अधिवक्ताओं के बीच गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां बुधवार को जिला विधिक संघ के अधिवक्ताओं ने एक आमसभा आयोजित कर निवर्तमान महासचिव सुबोध कुमार को पदच्युत करने का प्रस्ताव पारित किया. वहीं गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सुबोध कुमार ने बुधवार को आयोजित आमसभा को ही अवैध करार दे दिया.

अपने जारी बयान में सुबोध कुमार ने कहा कि विगत तीन दिसंबर को कुछ अधिवक्ताओं द्वारा अवैध रूप से प्रपत्र बिक्री कार्यालय में ताला लगाकर अवैध तरीके से प्रपत्र बिक्री किया जाने लगा. जिसके बाद पूरे बिहार के विधिक संघ की सदस्यता को मान्यता दिये जाने वाला बिहार काउंसिल के द्वारा नौ लोगों को कारणपृक्षा नोटिस जारी किया जाता है .15 दिसंबर को अपने पत्रांक 2593/2594 से नौ दिसंबर को अवैध तरीके से बनाये गये तदर्थ समिति को सिरे से खारिज करते हुए निर्वाचित कमिटी को ही मान्य रखते हुए 15 अप्रैल 2026 तक की अवधि विस्तार कर संपूर्ण कार्यवाही की जिम्मेदारी का निर्वहन पूर्ववत की भांति निर्धारित किया. इसके बावजूद कुछ अधिवक्ताओं द्वारा अपने गलत कार्य को छिपाने के लिए गलत-गलत हरकत कर रहे हैं. इनका कार्य संशोधित मॉडल रूप के विरूद्ध है. जिसे बिहार बार काउंसिल के द्वारा सिरे से खारिज किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में इनके द्वारा बेचा जा रहा प्रपत्र अवैध है. वे इस संबंध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय को भी अवगत करा दिये हैं. उन्होंने कहा कि बुधवार 24 दिसंबर को अवैध मीटिंग कर बार काउंसिल के द्वारा बढ़ाये गये अवधि को नहीं मानते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया गया तथा बार काउंसिल के द्वारा वैध कमिटी के प्रपत्र को खरीद बिक्री करने वाले अधिवक्ताओं पर कार्रवाई करने का प्रस्ताव लाना तथा निर्वाचित कमिटी को पदच्युत करने का भी प्रस्ताव लाना बिहार बार काउंसिल के आदेश का उल्लंघन ही नहीं, बार काउंसिल के खिलाफ एवं निंदनीय है.

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