टपकती झोपड़ी में बिस्तर पर जिंदगी काट रहे युवक की मार्मिक पुकार- साहब, बस अस्पताल पहुंचा दीजिए...

Heartbreaking Appeal : 35 वर्षीय बुधन मांझी गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण बिस्तर पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं. उनकी एकमात्र इच्छा अस्पताल पहुंचकर इलाज कराने की है, लेकिन झोपड़ी में उनका जीवन बेहद दयनीय है.

Heartbreaking Appeal : लखीसराय जिले के चानन प्रखंड के मननपुर गांव में रहने वाले 35 वर्षीय बुधन मांझी पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी के बीच बिस्तर पर जीवन बिताने को मजबूर हैं. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो सका है. अब उनकी सबसे बड़ी इच्छा किसी अस्पताल तक पहुंचकर इलाज कराने की है. खबर लिखे जाने तक डायल-112 नंबर पर सूचना भेजी जा चुकी है.

पेड़ से गिरने के बाद शुरू हुई मुश्किलों भरी जिंदगी

जानकारी के अनुसार, बुधन मांझी मूल रूप से जजबारा गांव के रहने वाले हैं. परिजनों के मुताबिक कुछ वर्ष पहले वह अपने ससुराल गए थे, जहां तंतुवन तोड़ने के दौरान पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए. उस समय उनका इलाज कराया गया और कुछ समय बाद वह सामान्य कामकाज भी करने लगे. बाद में वह मननपुर स्थित अपने मामा नारायण मांझी के घर रहने लगे, जहां कुछ समय बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई. इसके बाद से वह स्वयं चलने-फिरने में असमर्थ बताए जाते हैं.

झोपड़ी में गुजर रहा जीवन, ग्रामीण बन रहे सहारा

बुधन मांझी फिलहाल मननपुर बस्ती की एक झोपड़ी में रह रहे हैं. परिजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका नियमित इलाज नहीं हो पा रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के कुछ लोग समय-समय पर उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराते हैं. बरसात में झोपड़ी की छत से पानी टपकने, गर्मी में मच्छरों और सर्दी में ठंड के बीच उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है.

इलाज की उम्मीद में हर आने वाले से करते हैं गुहार

बुधन मांझी का कहना है कि यदि उन्हें किसी अच्छे अस्पताल में इलाज मिल जाए तो वह दोबारा सामान्य जीवन जीने की उम्मीद रखते हैं. उनका कहना है कि कई वर्षों से वह बिस्तर पर हैं और अब भी उपचार की आस लगाए हुए हैं. उनकी यह अपील सुनकर गांव आने वाले लोग भी भावुक हो जाते हैं.

जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की चुनौती

यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौती को भी सामने लाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर चिकित्सकीय सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो बुधन जैसे जरूरतमंद लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है. फिलहाल गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग और समाजसेवी संस्थाएं इस मामले पर ध्यान देंगी, ताकि उन्हें समुचित इलाज और आवश्यक सहायता मिल सके.


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लेखक के बारे में

By रंजन पासवान

रंजन पासवान प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. चानन (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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