किऊल नदी का पानी छोड़े जाने से टाल क्षेत्र में डूबी मकई की फसल, पैक्स अध्यक्षों ने लगाया मनमानी का आरोप

गोंदरी पुल से किऊल नदी का पानी छोड़े जाने से टाल क्षेत्र की तैयार मकई की फसल डूब गई है. पैक्स अध्यक्षों ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए किसानों के नुकसान के आकलन और मुआवजे की मांग की है.

लखीसराय : किऊल नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद गोंदरी पुल का फाटक खोलकर पानी छोड़े जाने से टाल क्षेत्र में मकई की फसल डूबने का मामला सामने आया है. किरणपुर के पैक्स अध्यक्ष अनंत कुमार आनंद और खावा राजपुर के पैक्स अध्यक्ष प्रकाश कुमार उर्फ जेपी ने जिम्मेदार अधिकारियों पर मनमाने तरीके से पानी छोड़े जाने का आरोप लगाया है.

पैक्स अध्यक्षों का कहना है कि किऊल नदी में बाढ़ के पानी का दबाव कम करने के लिए गोंदरी पुल का फाटक खोलना जरूरी था, लेकिन पानी छोड़ते समय टाल क्षेत्र में लगी किसानों की फसल को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था.

किरणपुर व अवगिल रामपुर मौजे का बाढ़ में डूबा मकई का फसल | Prabhat Khabar Network

धीरे-धीरे पानी छोड़ने से बच सकती थी फसल : पैक्स अध्यक्ष

किरणपुर के पैक्स अध्यक्ष अनंत कुमार आनंद और खावा राजपुर के पैक्स अध्यक्ष प्रकाश कुमार उर्फ जेपी ने कहा कि गोंदरी से पानी धीरे-धीरे छोड़ा जाता और उसे नदी तक ही सीमित रखने के बाद फाटक बंद कर दिया जाता, तो मकई की फसल को डूबने से बचाया जा सकता था.

उनका कहना है कि टाल क्षेत्र में बाढ़ का पानी तेजी से नहीं फैलता. करीब दस दिनों में मकई की फसल पककर कटाई के लिए तैयार होने वाली थी. ऐसे में अचानक पानी छोड़े जाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

कई मौजों में डूबी मकई की फसल

पैक्स अध्यक्षों के अनुसार, पानी फैलने से किरणपुर, अवगिल रामपुर, खावा राजपुर, बंशीपुर, ताजपुर समेत कई मौजों में लगी मकई की फसल डूब गयी. किसानों की तैयार होने के करीब पहुंची फसल पानी में डूबने से नष्ट हो गयी.

फसल के नुकसान से किसानों की लगायी गयी लागत भी डूब गयी है. इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

फसल क्षति का आकलन कर मुआवजे की मांग

पैक्स अध्यक्षों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से डूबी हुई फसलों का सर्वेक्षण कराने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को फसल क्षति के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि किसान अगले सीजन में दोबारा खेती शुरू कर सकें.

उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए पानी छोड़ा जाना जरूरी हो सकता है, लेकिन ऐसा करते समय टाल क्षेत्र में किसानों की तैयार फसल और संभावित नुकसान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

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लेखक के बारे में

By रणजीत कुमार शर्मा

रणजीत कुमार शर्मा प्रिंट माध्यम में 10 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. मेदनीचौकी (लखीसराय) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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