शिक्षा के माध्यम से ही बालिकाएं बन सकती हैं आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी

महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत संचालित सौ दिवसीय कार्यक्रम के तहत सोमवार को जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कैंदी में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कैंदी में चला जागरूकता कार्यक्रम

बालिकाओं को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के दुष्प्रभावों से कराया गया अवगत

लखीसराय. महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत संचालित सौ दिवसीय कार्यक्रम के तहत सोमवार को जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कैंदी में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं एवं विद्यालय समुदाय को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा इसके उन्मूलन के लिए जन-जागरूकता को सशक्त करना था. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला मिशन समन्वयक प्रशांत कुमार, वार्डन सह शिक्षिका सरिता कुमारी, एएनएम सपना कुमारी, वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ अमित कुमार एवं लैंगिक विशेषज्ञ किस्मत कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया. इसके उपरांत उपस्थित छात्राओं को संबोधित करते हुए जिला मिशन समन्वयक प्रशांत कुमार ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ कानूनन अपराध भी है. यह बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और बचपन को प्रभावित करता है तथा इसके दुष्परिणाम पूरे जीवन तक झेलने पड़ते हैं, जिसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है. उन्होंने बाल विवाह का सशक्त विरोध करने की अपील करते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं महिला हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 181 की जानकारी दी तथा आवश्यकता पड़ने पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया. वहीं लैंगिक विशेषज्ञ किस्मत कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और यह महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है. बाल विवाह जैसी प्रथा बालिकाओं की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को इसके बहिष्कार के लिए आगे आना चाहिए और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में सक्रिय सहयोग करना चाहिए. वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ अमित कुमार ने छात्राओं को शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जब पढ़ेंगे, तभी सशक्त होंगे”. उन्होंने स्पष्ट किया कि सशक्तिकरण का अर्थ केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि अपने जीवन से जुड़े निर्णयों को स्वयं लेने की क्षमता विकसित करना भी है. शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे बालिकाएं आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकती हैं. कार्यक्रम के अंत में बाल विवाह की रोकथाम हेतु सभी उपस्थित छात्राओं एवं कर्मियों को सामूहिक रूप से शपथ दिलायी गयी. साथ ही स्वच्छता प्रबंधन किट्स का वितरण कर स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया. इस अवसर पर एमटीएस नवींद्र दास सहित विद्यालय की दर्जनों छात्राएं उपस्थित रहीं.

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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