नीट यूजी परीक्षा फर्जीवाड़ा मामला: ईओयू सभी 30 आरोपियों 72 घंटे के रिमांड पर लेकर पटना रवाना

नीट यूजी परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में ईओयू ने 30 आरोपियों को 72 घंटे की रिमांड पर लिया है। पटना में मास्टरमाइंड और बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।

रिमांड पर लेने के पूर्व बुधवार को 14 व गुरुवार को 16 आरोपियों सदर अस्पताल में कराया गया मेडिकल जांच गत 21 जून को दूसरे के बदले परीक्षा देते नौ फर्जी परीक्षार्थी की हुई थी गिरफ्तारी उक्त मामले में नौ फर्जी परीक्षार्थी, 18 बायोमेट्रिक कर्मी सहित कुल 30 अभियुक्त हुए थे गिरफ्तार फोटो संख्या 04- पुलिस अभिरक्षा में सभी आरोपितों को कोर्ट ले जाती प्रतिनिधि, लखीसराय. नीट यूजी परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में लखीसराय पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम को बड़ी कामयाबी मिलने के बाद अब जांच की कमान पूरी तरह ईओयू ने संभाल ली है. कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद ईओयू की टीम सभी 30 आरोपियों को 72 घंटे की रिमांड पर लेकर पटना के लिए रवाना हो गयी है. पटना में इन सभी आरोपियों से इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं और मास्टरमाइंड के नेटवर्क को खंगालने के लिए गहन पूछताछ की जायेगी. रिमांड से पहले सदर अस्पताल में हुआ मेडिकल चेकअप आरोपियों को रिमांड पर पटना ले जाने से पहले सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उनका मेडिकल टेस्ट कराया गया. बुधवार को जहां पहले चरण में 14 आरोपियों की जांच कराई गयी थी, वहीं गुरुवार को शेष 16 आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच लखीसराय सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी मेडिकल जांच पूरी की, जिसके बाद कोर्ट की प्रक्रिया पूरी कर ईओयू की टीम सभी को अपने साथ पटना ले गयी. 21 जून को हुआ था बड़े रैकेट का खुलासा बता दें कि बीते 21 जून को नीट यूजी परीक्षा के दौरान लखीसराय में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था. परीक्षा केंद्रों पर कड़ाई के दौरान दूसरे असली परीक्षार्थियों के बदले परीक्षा देते हुए 9 फर्जी परीक्षार्थियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था. कुल 30 आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ फर्जी परीक्षार्थियों को दबोचा, बल्कि परीक्षा में उनकी मदद करने वाले सिंडिकेट का भी पर्दाफाश किया. इस मामले में अब तक 09 फर्जी परीक्षार्थी, 18 बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मी, जिनकी मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थी अंदर घुसे, एक मूल परीक्षार्थी व दो सहयोग सहित कुल 30 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. पटना में खुलेगा फर्जीवाड़े का बड़ा राज ईओयू सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपियों को अगले 72 घंटों तक आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जायेगी. बायोमेट्रिक कर्मियों और स्कॉलर्स के इस गठजोड़ के पीछे बिहार और अंतरराज्यीय स्तर के कौन से बड़े सॉल्वर गैंग शामिल हैं, इस रिमांड अवधि के दौरान इसका बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है. सभी दर्ज मामले ईओयू को ट्रांसफर जिले के चार परीक्षा केंद्रों में से तीन परीक्षा केंद्र केंद्रीय विद्यालय से सात, केआरके हाईस्कूल व हसनपुर हाईस्कूल परीक्षा केंद्र से एक-एक दूसरे के बदले परीक्षा देते फर्जी परीक्षार्थी को गिरफ्तार किया गया था. इसके निशानदेही पर एक मूल अभ्यर्थी व 18 बायोमेट्रिक कर्मी को पुलिस ने धर दबोचा था. उक्त मामले में किऊल थाना में एक व कवैया थाना में दोनों केंद्राधीक्षक के लिखित आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. जिसमें सभी मामलों में डीएसपी रैंक के पदाधिकारी को अनुसंधानकर्ता बनाया गया लेकिन मामले को ईओयू के हाथ में जाने के बाद सभी दर्ज मामले ईओयू में ट्रांसफर कर दिया गया है. जिससे यहां के स्थानीय पदाधिकारी उक्त मामले में कुछ भी बताने से कतराते नजर आये. तीन-चार दिन से लखीसराय में जमे हुए ईओयू की टीम नीट परीक्षा में धराये सभी 30 आरोपितों को रिमांड पर लेने के लिए पिछले तीन-चार दिनों से ईओयू की टीम लखीसराय पहुंचे हुए थे, तथा रिमांड पर लेने की तैयार लगे थे. अंतत: कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद सभी आरोपियों का मेडिकल जांच के बाद 72 घंटे की रिमांड पर लेने जाने की अनुमति मिली है. मुख्य आरोपी अब भी पुलिस शिकंजे से बाहर नीट परीक्षा में धराये अधिकांश फर्जी परीक्षार्थी व उसके सहयोग करने वाले अधिकांश बायोमेट्रिक कर्मी ने मुख्य रूप से इस खेल के मास्टरमाइंड रविशंकर सम्राट एवं प्रमोद यादव को बताया. हालांकि ये दोनों अब भी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है.

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