बदलाव की बयार: लखीसराय के 5 गांवों ने लिया मृत्युभोज के बहिष्कार का संकल्प, सामाजिक कुरीति पर प्रहार

Mrityubhoj Boycott : लखीसराय के खर्रा गांव में ग्रामीणों ने मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर ऐतिहासिक फैसला लिया. बैठक में पांच गांवों के लोगों ने सामूहिक रूप से मृत्युभोज का बहिष्कार करने की शपथ ली और जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Mrityubhoj Boycott : लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र स्थित खर्रा गांव में रविवार देर शाम सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई. खर्रा पुस्तकालय भवन में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने मृत्युभोज जैसी कुप्रथा का सामूहिक बहिष्कार करने का संकल्प लिया. बैठक में खर्रा के अलावा आसपास के पांच गांवों के लोगों ने भाग लिया और समाज में फैली इस कुरीति को समाप्त करने पर सहमति जताई.

पांच गांवों के लोगों ने लिया संकल्प

बैठक की अध्यक्षता अलीनगर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि मुकेश यादव ने की, जबकि संचालन राजद जिलाध्यक्ष सह यादव महासभा के जिलाध्यक्ष राजेश प्रसाद यादव उर्फ भगवान यादव ने किया. कार्यक्रम में युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए. हालांकि कुछ पंचायत प्रतिनिधि निजी कारणों से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से बैठक सफल रही.

मृत्युभोज से परिवारों पर पड़ता है आर्थिक बोझ

बैठक के दौरान कुछ लोगों ने परंपरा के पक्ष में अपनी बात रखी. इस पर मोहम्मदपुर पंचायत के पूर्व मुखिया नित्यानंद यादव, भोला यादव, सुरेंद्र यादव, नवल किशोर राम तथा पत्रकार विनय कुमार सुमन ने तर्कपूर्ण ढंग से समझाया कि मृत्युभोज पर होने वाला अत्यधिक खर्च कई परिवारों को कर्ज के बोझ तले दबा देता है. उन्होंने सुझाव दिया कि इस राशि का उपयोग गरीब कन्याओं के विवाह, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों पर किया जाना चाहिए.

15 से 20 लाख रुपये तक होता है खर्च

Mrityubhoj Boycott : बैठक में बताया गया कि खर्रा, निस्ता, खेमतरनी स्थान, चननियां और नवाबगंज सहित पांच गांवों में एक सामान्य मृत्युभोज पर 15 से 20 लाख रुपये तक खर्च हो जाता है. ग्रामीणों ने इसे अनावश्यक खर्च बताते हुए सामाजिक सुधार की दिशा में इसे समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया.

अगली बैठक चननियां गांव में होगी

बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अगली बैठक चननियां गांव में आयोजित की जाएगी. पांचों गांवों में अभियान पूरा होने के बाद संयुक्त रूप से मृत्युभोज बहिष्कार की औपचारिक घोषणा की जाएगी.

समाज सुधार की दिशा में बताया ऐतिहासिक कदम

ग्रामीणों ने कहा कि मृत्युभोज का बहिष्कार केवल एक सामाजिक निर्णय नहीं, बल्कि समाज सुधार और नव निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उनका मानना है कि यह अभियान अन्य गांवों और समुदायों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा.

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Published by: Pintu Pranav

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