किऊल नदी में जहर डाल कर मारी लाखों की मछलियां, तबाही

किऊल नदी में जहर डाल कर मारी लाखों की मछलियां, तबाही

आक्रोश : सुरजीचक से जगदीशपुर घाट तक नदी की सतह पर तैर रही मरी मछलियां, जलकर धारकों को लाखों का नुकसान

सूर्यगढ़ा. प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली किऊल नदी में अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा जहर डाल दिए जाने से लाखों की संख्या में मछलियों की मौत हो गयी. इस हृदयविदारक घटना का सबसे ज्यादा असर सुरजीचक घाट से लेकर जगदीशपुर घाट तक देखा गया. गुरुवार को जैसे ही ग्रामीणों ने नदी की सतह पर सफेद चादर की तरह तैरती मरी हुई मछलियों को देखा, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया.

मछलियां लूटने की मची होड़

घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग नदी किनारे जमा हो गए. जान जोखिम में डालकर लोग मरी हुई जहरीली मछलियों को पकड़ने के लिए पानी में उतर गए, जिससे स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

लाखों की क्षति से दाने-दाने को मोहताज हुए मछुआरे

जलकर धारक पंकज कुमार ने व्यथित होकर बताया कि नवाबगंज, कसोई, पेरिया निस्ता, दशानिया और छोहनियां जलकर क्षेत्रों में जहर का व्यापक असर है. उन्होंने बताया कि 25 सदस्यों ने मिलकर चार जलकर लिए थे, जिसमें पूरी पूंजी लगी थी. इस घटना से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. पंकज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर साल मोहनपुर गांव के समीप सुरजीचक घाट पर ऐसी वारदात होती है, लेकिन प्रशासन मौन है.

मुआवजे व दोषियों पर कार्रवाई की मांग

मछुआरा समाज व जलकर धारकों ने जिला प्रशासन से दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने और हुए भारी नुकसान के बदले मुआवजे की मांग की है. फिलहाल छोटी नावों के सहारे मरी हुई मछलियों को नदी से बाहर निकाला जा रहा है ताकि संक्रमण न फैले. स्थानीय लोगों में प्रशासन की शिथिलता को लेकर भारी रोष है.

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