मेदनीचौकी (लखीसराय) से रंजीत कुमार शर्मा की रिपोर्ट
MGNREGA Work Corruption: ताजपुर पंचायत की जनता आज भी बुनियादी विकास कार्यों के लिए रास्ता देख रही है. एक पंचवर्षीय योजना के तहत यहां के लोगों को शुरुआती दो वर्षों तक ही मनरेगा योजनाओं का थोड़ा-बहुत लाभ मिल सका, जिसके बाद आखिरी के तीन साल विकास कार्य पूरी तरह ठप रहा. पंचायत चुनाव नजदीक आने के बावजूद धरातल पर कोई नई योजना नजर नहीं आ रही है.
रोजगार सेवक ने दी काम की जानकारी
ताजपुर पंचायत के मनरेगा रोजगार सेवक आनंद मोहन ने आधिकारिक जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि इस पंचवर्षीय योजना के दौरान पंचायत में केवल 10 लाख रुपये की लागत से ही काम कराए जा सके हैं. इन कार्यों में एक तालाब की खुदाई, एक अन्य तालाब की साफ-सफाई और एक खेल मैदान में मिट्टी भराई का कार्य ही शामिल है.
रसुलपुर गांव में सिमट कर रह गईं योजनाएं
पंचायत के पूर्व वार्ड सदस्य संजय कुमार यादव ने बताया कि मनरेगा के तहत जो भी सीमित काम हुए, वे रसुलपुर गांव में ही कराए गए. रसुलपुर में एक नया तालाब खोदा गया और दूसरे पुराने तालाब की गाद साफ कराई गई. इसके अलावा इसी गांव के एक क्षेत्र में मनरेगा योजना के तहत कुछ पौधे भी रोपे गए थे, लेकिन इसके बाद पूरी पंचायत में काम बंद हो गया.
5 करोड़ की जगह ऊंट के मुंह में जीरा
रोजगार सेवक के अनुसार, एक पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान पंचायत के विकास और मजदूरों को रोजगार देने के लिए सरकार द्वारा लगभग 5 करोड़ रुपये तक की विभिन्न योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति दी जाती है. इस विशाल बजट के सामने महज 10 लाख रुपये खर्च होना 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहा है, जिससे मजदूरों को भी पलायन करना पड़ा.
विकास की राह में रोड़ा बनी भौगोलिक स्थिति और बाढ़
जब रोजगार सेवक से काम न होने के कारणों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसके पीछे जागरूकता की कमी को मुख्य वजह बताया. इसके साथ ही उन्होंने दलील दी कि ताजपुर पंचायत की भौगोलिक स्थिति और इसका बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होना भी विकास कार्यों के आड़े आया. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब मनरेगा योजनाओं के नियमों और नाम में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत आगामी दिनों में नए सिरे से काम शुरू किया जाएगा.
MGNREGA Work Corruption: चुनाव नजदीक, ग्रामीणों ने लगाया उपेक्षा का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल समाप्त होने की कगार पर है और अगले कुछ महीनों में पंचायत चुनाव होने वाले हैं. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता के कारण 5 साल बीत जाने के बाद भी आम जनता को इस कल्याणकारी योजना का कोई सीधा लाभ नहीं मिल पाया. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए ताकि सरकारी राशि के इस तरह डंप रहने की सच्चाई सामने आ सके.
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