8 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी गोपाल मिश्रा को मिली अंतिम आजीवन कारावास की सजा

लखीसराय की विशेष पॉक्सो अदालत ने 8 साल की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के दोषी गोपाल मिश्रा को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए 10.50 लाख रुपये मुआवजे का भी आदेश दिया है. यह फैसला चार्जशीट के तीन महीने के भीतर सुनाया गया, जो त्वरित न्यायिक प्रक्रिया का एक मिसाल है.

Lakhisarai POCSO Verdict: लखीसराय. जिले के न्यायिक इतिहास में विशेष पॉक्सो अदालत के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आठ वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायाधीश सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम श्वेता वर्मा की अदालत ने आरोपी 44 वर्षीय गोपाल मिश्रा को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और चिकित्सा जरूरतों को देखते हुए 10.50 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

चार्जशीट के तीन महीने के भीतर पूरा हुआ ट्रायल

मामले में पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के महज तीन महीने के भीतर न्यायालय ने ट्रायल पूरा कर फैसला सुना दिया. अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद करीब एक सप्ताह के भीतर सभी गवाहों के बयान दर्ज किए गए. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई को प्राथमिकता दी.

आरोपी को आजीवन कारावास

यह मामला मेदनीचौकी थाना कांड संख्या 31/2026 और पॉक्सो केस संख्या 32/2026 से संबंधित है. दोषी गोपाल मिश्रा, मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के देवघरा निवासी स्व. रविकांत मिश्रा का पुत्र है. अदालत ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत उसे दोषी ठहराया.अदालत ने उसे प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड की राशि की वसूली के बाद इसे पीड़िता के चिकित्सीय खर्च और पुनर्वास में उपयोग करने का निर्देश दिया गया.

पीड़िता के पुनर्वास के लिए 10.50 लाख रुपये

न्यायालय ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पीड़िता को 10.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. यह राशि पीड़िता के उपचार, पुनर्वास और भविष्य की आवश्यकताओं में सहायता के लिए दी जाएगी. अदालत ने पीड़िता के हित और उसके बेहतर भविष्य को प्राथमिकता दी.

फॉरेंसिक साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन पक्ष

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र कर उन्हें वैज्ञानिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा. फॉरेंसिक रिपोर्ट से मिले वैज्ञानिक निष्कर्षों ने अभियोजन पक्ष के मौखिक साक्ष्यों को मजबूती दी. वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत को मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिली.

त्वरित जांच और न्यायिक प्रक्रिया की मिसाल

Lakhisarai POCSO Verdict: अपर लोक अभियोजक गुप्तेश्वर सिंह ने फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला समयबद्ध पुलिस अनुसंधान, त्वरित चार्जशीट, वैज्ञानिक साक्ष्यों के बेहतर संग्रह और न्यायिक प्रक्रिया की तत्परता का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और गंभीर अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है.मामले में बचाव पक्ष की ओर से डालसा अधिवक्ता कमलेश कुमार शांडिल्य ने पैरवी की.

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By राजेश कुमार

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