सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए गुड्स सुपरवाइजर से पिछले तीन दिनों से लगातार गहन पूछताछ की जा रही है. बताया जा रहा है कि यह पूरी कार्रवाई किसी बड़ी विभागीय वित्तीय या प्रशासनिक गड़बड़ी के आरोप में की गई है. हालांकि, विजिलेंस टीम ने इस बेहद गोपनीय कार्रवाई के कारणों की स्पष्ट जानकारी किऊल स्टेशन के किसी भी स्थानीय अधिकारी से साझा नहीं की है.
बिना स्थानीय अधिकारियों को सूचना दिए अचानक पहुंची टीम
विजिलेंस की इस औचक दबिश से स्थानीय रेल महकमे में पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है. घटनाक्रम को लेकर अंदरूनी सूत्र बताते हैं:
- गोपनीय दबिश: नाम न छापने की शर्त पर एक रेल अधिकारी ने बताया कि बीते शुक्रवार (10 जुलाई) की अपराह्न करीब चार बजे विजिलेंस की टीम अचानक किऊल यार्ड स्थित माल गोदाम पहुंची.
- सीधे ले गई साथ: टीम ने स्थानीय स्टेशन प्रबंधन या किसी भी अन्य पदाधिकारी को भनक तक नहीं लगने दी और सीधे गुड्स सुपरवाइजर को हिरासत में लेकर अपने साथ गाड़ी में बिठा लिया.
आरपीएफ इंस्पेक्टर ने की हिरासत की पुष्टि
इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी सीमित जानकारी ही दे पा रही हैं. किऊल के आरपीएफ (RPF) इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह सच है कि गुड्स सुपरवाइजर को विजिलेंस की टीम अपने साथ ले गई है. हालांकि, विजिलेंस विभाग के आला अधिकारियों ने उन्हें भी हिरासत का मुख्य कारण या मामले से जुड़ा कोई अन्य विधिक दस्तावेज साझा नहीं किया है.
फिलहाल, दानापुर में विजिलेंस की विशेष टीम सुपरवाइजर पी. सुबंधु से फाइलों और दस्तावेजों को खंगालते हुए पूछताछ कर रही है. रेल मुख्यालय द्वारा इस मामले में कोई भी आधिकारिक बयान या प्रेस नोट जारी होने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मामले की असली वजह सामने आ पाएगी.
