पटना और हावड़ा का सफर होगा और तेज, किऊल रेलखंड पर शुरू हुई बड़ी परियोजना, जानें कब मिलेगा फायदा

Kiul Railway News: बिहार के किऊल-हावड़ा रेलखंड पर रेलवे ने तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की बड़ी परियोजना शुरू की है. यह 17 हजार करोड़ की परियोजना 3 साल में पूरी होगी, जिससे ट्रेनों का परिचालन तेज और सुचारु होगा. यात्रियों को पटना, झाझा, आसनसोल, सीतारामपुर और हावड़ा के बीच यात्रा में कम समय लगेगा.

Kiul Railway News: लखीसराय. बिहार के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल किऊल-हावड़ा रेलखंड पर रेलवे ने बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की शुरुआत कर दी है. इस परियोजना के तहत किऊल से सीतारामपुर और किऊल से झाझा तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. रेलवे का दावा है कि करीब तीन साल में परियोजना पूरी होने के बाद पटना, हावड़ा और झाझा की ओर जाने वाली ट्रेनों का परिचालन अधिक तेज और सुचारु होगा. इससे यात्रियों को कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंचने का लाभ मिलेगा.

तीसरी और चौथी लाइन से बदलेगी रेल परिचालन की तस्वीर

रेलवे अधिकारियों के अनुसार मौजूदा रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसी कारण कई बार ट्रेनों को क्रॉसिंग या ओवरटेक के लिए रुकना पड़ता है, जिससे देरी होती है.

नई तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने के बाद अलग-अलग ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन आसान होगा. इससे मेल, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों का परिचालन अधिक व्यवस्थित होगा और अनावश्यक ठहराव कम होंगे.

17 हजार करोड़ रुपये से बन रही बड़ी परियोजना

रेलवे की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किऊल से सीतारामपुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है.

इसके अलावा किऊल से झाझा तक करीब 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के निर्माण पर लगभग 965 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

अन्य रेलखंडों में भी लगभग 50 किलोमीटर के लिए 2628 करोड़ रुपये और एक अन्य सेक्शन में 2268 करोड़ रुपये की लागत से तीसरी और चौथी लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो चुका है.

तीन साल में पूरा होने का लक्ष्य

रेलवे ने इस पूरी परियोजना को लगभग तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी, परिचालन क्षमता में सुधार होगा और समय पालन (पंक्चुअलिटी) भी बेहतर होने की उम्मीद है.

Kiul Railway News: यात्रियों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उन यात्रियों को मिलेगा, जो नियमित रूप से पटना, झाझा, आसनसोल, सीतारामपुर और हावड़ा के बीच यात्रा करते हैं.

नई लाइन बनने से ट्रेनों के रुकने की आवश्यकता कम होगी, यात्रा समय घटेगा और व्यस्त रेलखंड पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा. साथ ही भविष्य में नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी आसान होगा.

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