-दूर-दून से रामकथा सुनने के लिए पहुंचे श्रद्धालु
-रामकथा के दूसरे दिन भी बापू ने लोगों को कराया श्रृंगी ऋषि धाम का स्मरण
लखीसराय. प्रसिद्ध अशोक धाम में शनिवार से प्रसिद्ध कथावाचक संत मोरारी बापू के द्वारा रामकथा का आयोजन प्रारंभ किया गया. जिसके दूसरे दिन रविवार को मोरारी बापू ने स्थानीय भूमि के प्रशंसा करते हुए कहा कि कई चेतनाओं से भरपूर भूमि पर नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन शांता सुखाय, हम दूसरे दिन का प्रवचन कर रहे हैं तो यहां प्रकट और अप्रकट समस्त चेतनाओं को व्यास पीठ से प्रणाम करते हैं. इस दौरान उन्होंने प्रेम, आदर और मौन का संदेश दिया. प्रवचन के दौरान बापू ने समय और परिस्थिति के अनुरूप उठे एक जिज्ञासु श्रोता के प्रश्न को आधार बनाकर प्रेम और संबंधों की सूक्ष्म व्याख्या प्रस्तुत किया. श्रोता का नाम न लेकर उनके प्रश्न का जिक्र करते हुए कहा ने एक श्रोता ने उनसे जिज्ञासा वश प्रश्न किया कि यदि प्रेम का संबंध निर्गुण से है और प्यार का संबंध सगुण से है, तो पत्नी से प्रेम करना चाहिए या प्यार. यह प्रश्न सुनते ही पंडाल में एक क्षण का मौन छा गया, मानो हर व्यक्ति अपने भीतर उत्तर खोजने लगा. बापू ने अत्यंत सहज और गहन शैली में उत्तर देते हुए कहा कि प्रेम और प्यार दोनों ही ऊंचे भाव हैं, परंतु उनसे पहले जीवन में आदर और सम्मान का स्थान आता है. उन्होंने कहा कि पत्नी के प्रति आदर और सम्मान होना सबसे आवश्यक है, क्योंकि यही किसी भी संबंध की आधारशिला है. प्रेम और प्यार बड़ी चीजें हैं, उन्हें शब्दों में बांधना आसान नहीं है. जब आदर और सम्मान होता है, तभी प्रेम स्वतः विकसित होता है. बापू ने भारतीय ऋषि परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा ऋषि बोलता है, मुनि मौन रहता है. इस वाक्य के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि ज्ञान केवल वाणी से नहीं, मौन और आचरण से भी प्रकट होता है. कई बार मौन ही सबसे बड़ा उत्तर होता है, और यही मौन जीवन को दिशा देता है. श्रृंगी ऋषि धाम की चर्चा करते हुए कहा कि यह भूमि तप, त्याग और साधना की साक्षी रही है. अशोक धाम में आयोजित रामकथा केवल कथा-वाचन नहीं, बल्कि आत्मबोध का माध्यम बन रही है. उन्होंने कहा कि रामकथा हमें रिश्तों की मर्यादा, कर्तव्य और करुणा का पाठ पढ़ाती है. भगवान राम का जीवन आदर्श है, जहां हर संबंध में मर्यादा और सम्मान सर्वोपरि है. आज के समय में संबंधों में सबसे बड़ी कमी धैर्य और संवेदनशीलता की है. रामकथा हमें सिखाती है कि संबंध निभाने के लिए केवल भावनाएं नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समझ भी आवश्यक है. जब मनुष्य अपने कर्तव्यों को समझता है, तभी प्रेम स्थायी बनता है. इस दौरान कई बार पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा, तो कई क्षणों में पूर्ण मौन छा गया. यह मौन ही उस आध्यात्मिक संवाद का प्रमाण था, जो व्यास पीठ से सीधे श्रोताओं के हृदय तक पहुंच रहा था. रामकथा के दूसरे दिन का समापन भक्ति भाव और आत्मचिंतन के साथ किया गया. मुरारी बापू ने प्रवचन के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि प्रेम, प्यार, आदर और सम्मान ये सभी जीवन के अभिन्न अंग हैं, रामकथा हमें इन्हें संतुलन में जीना सिखाती है. लगभग तीन घंटे के प्रवचन के दौरान मोरारी बापू अपने सहयोगी के साथ भक्ति युक्त संगीत से श्रोताओं को मोहित करते रहे. मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, अशोक धाम मंदिर ट्रस्ट के सचिव डॉ कुमार अमित, डॉ प्रवीण कुमार सिन्हा, डॉ रूपा सिंह, आनंद अग्रवाल एवं प्रो मनोरंजन कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे.
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