Lakhisarai Health News: लखीसराय. एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर जिले में एफसीएम इंट्रावेनस थेरेपी की शुरुआत की गई है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक जिले की 349 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम का सिंगल डोज दिया जा चुका है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडलीय अस्पताल और सदर अस्पताल के माध्यम से चिन्हित लाभार्थियों को यह सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है.
गर्भवती महिलाओं में एनीमिया पर नियंत्रण की पहल
लखीसराय के सिविल सर्जन डॉ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि एनीमिया महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है. गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी का असर मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. इसी को देखते हुए एफसीएम इंट्रावेनस के सिंगल डोज की शुरुआत की गयी है.
एफसीएम से तेजी से पूरी होगी आयरन की कमी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एफसीएम यानी फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंट्रावेनस आयरन थेरेपी है, जिसे जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय निगरानी में दिया जाता है. विभाग का कहना है कि यह शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद करती है और कुछ चिन्हित मरीजों में बार-बार आयरन की दवा लेने की जरूरत कम कर सकती है. इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाता है.
पीएचसी से सदर अस्पताल तक नि:शुल्क सुविधा
जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि एफसीएम की सुविधा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडलीय अस्पताल और सदर अस्पताल के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है. चिन्हित गर्भवती महिलाओं को आयरन की कमी के आधार पर चिकित्सकीय परामर्श के बाद यह दवा दी जा रही है.
एनीमिया से सुरक्षित मातृत्व की ओर कदम
डीपीएम ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से थकान, कमजोरी समेत कई स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है. गंभीर आयरन की कमी वाले मामलों में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार इंट्रावेनस आयरन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य समय पर उपचार उपलब्ध कराकर सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ शिशु के लक्ष्य को मजबूत करना है.
आशा और एएनएम कर रहीं महिलाओं की पहचान
Lakhisarai Health News: स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान की जा रही है. चिन्हित महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक लाकर आवश्यक जांच और चिकित्सकीय सलाह के बाद एफसीएम की खुराक दी जा रही है.
