अपने दुख के समय ब्रह्म ज्ञानी बनो और दूसरे के समय संसारी: अभिनव चौधरी

अपने परिवेश को बचाये बगैर हम बच नहीं सकते. यही धर्म का मर्म है

लखीसराय. अपने परिवेश को बचाये बगैर हम बच नहीं सकते. यही धर्म का मर्म है. श्रीश्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी के इसी भाव धारा को जीवंत करने के लिए आरलाल कॉलेज के समीप रविवार को सत्संग अधिवेशन केंद्र लखीसराय में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया. जिसमें आसपास के जिलों से प्रबुद्ध कर्मी गण भाग लिये. जिसमें बेगूसराय से आये अभिनव चौधरी ने बताया कि ठाकुर जी कहते हैं यदि अपने कष्ट के समय संसारी बनते हो तो दूसरे के समय ब्रह्मज्ञानी मत बनो. बल्कि अपने दुख के समय ब्रह्म ज्ञानी बनो और दूसरे के समय संसारी. ऐसा कृत्रिम भाव भी अच्छा है. यदि मनुष्य हो तो अपने दुख में हंसो और दूसरों के दुख में रोओ. शेखपुरा से आये उमेश प्रसाद बताते हैं कि हमारे अंदर कुमति और सुमति दोनों विराजमान है. जब हम गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं उनका अनुपालन करते हैं तो हमारे अंदर की सुमति जागृत रहती है. स्थानीय ऋत्विक दिनेश महतो कहते हैं हमें लता का स्वभाव अवलंबन करना चाहिए और आदर्श रूपी वृक्ष को लिपटकर धरना चाहिए. हमारे आदर्श हैं श्रीश्री ठाकुर अनुकुलचंद्र. बेगूसराय के ऋत्विक विकास कुमार कहते हैं हमारा बंधु अगर कुपथ पर जाता है और यदि हम उसे लौटाने की चेष्टा नहीं करते हैं अथवा उसका परित्याग करते हैं तो उसकी सजा हमें भी नहीं छोड़ेगी. बेगूसराय से आये सुनील कुमार एवं खगड़िया से आये क्रांति कुमार ने श्रीश्री ठाकुर जी के भाव धारा पर आधारित भजन का परिवेशन कर सबों को भक्ति रस में डुबो दिया. उत्सव को सफल बनाने में बृजेश कुमार, अविनाश कुमार, मनोज कुमार, सुनील कुमार, जितेंद्र कुमार, देवेंद्र साह उर्फ पप्पू दा, पिंटू दा, बमबम, डॉक्टर पंकज, नारद पासवान, राजो साह, अमित कुमार, सुमित्रा कुमारी कन्हैया, राहुल, अंकित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.सत्संग सभा में डीएम मिथिलेश मिश्र, फिल्मकार रविराज पटेल सहित अनेकों प्रबुद्धजन भी उपस्थित रहे.

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लेखक के बारे में

Published by: Sharath tripathi

शरतचंद्र त्रिपाठी प्रिंट माध्यम में 17 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत अमर उजाला से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में कार्यरत हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं. जमीनी रिपोर्टिंग के जरिये हाशिये के सवालों को मुख्यधारा में लाने पर जोर.

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