बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के विरुद्ध आक्रोश मार्च

बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हो रहे कथित अमानवीय अत्याचार, हिंसा और मानवाधिकार हनन के विरोध में शुक्रवार को शहर में एक विशाल आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया.

हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से दर्ज कराया विरोध

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध की नारेबाजी

लखीसराय. बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हो रहे कथित अमानवीय अत्याचार, हिंसा और मानवाधिकार हनन के विरोध में शुक्रवार को शहर में एक विशाल आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया. आक्रोश मार्च विद्यापीठ चौक से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बाजार समिति परिसर तक पहुंचा. मार्च में हजारों की संख्या में भाजपा के कार्यकर्ता, समाजसेवी संगठन तथा हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए. सभी ने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराते हुए पीड़ित हिंदू भाइयों-बहनों के प्रति एकजुटता का संदेश दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक कुमार सिंह कर रहे थे. मार्च के दौरान शामिल लोगों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरूद्ध नारेबाजी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस विषय में संज्ञान लेने की मांग की. मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि बांग्लादेश की धरती पर हमारे हिंदू भाई-बहनों पर हो रहे अत्याचार अत्यंत चिंताजनक हैं. मंदिरों को क्षति पहुंचायी जा रही है और निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. यह केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि मानवता और सभ्यता का प्रश्न है. भारत सरकार ने इस विषय में कूटनीतिक स्तर पर कदम उठाये हैं, लेकिन अब वैश्विक स्तर पर जन-आवाज को और मजबूती देने की आवश्यकता है. हम मांग करते हैं कि पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाय. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज की एकता और शांतिपूर्ण विरोध ही इस प्रकार के अन्याय के विरूद्ध सबसे बड़ी ताकत है. मार्च में विहिप के जिला संरक्षक डॉ कुमार अमित, भाजपा महामंत्री सनोज साहू, प्रमोद कुशवाहा, जिला मंत्री हिमांशु पटेल, अभिषेक सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष गौतम मंडल, चंदन यादव, बजरंग दल के सोनू पटेल तथा जनसंख्या नियंत्रण फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव कृष्ण मुरारी सहित अनेक प्रमुख कार्यकर्ता एवं सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे. यह आक्रोश मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और बांग्लादेश में पीड़ित हिंदू समाज के समर्थन में धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा के संकल्प का प्रतीक बना. आयोजन के माध्यम से समाज के सभी वर्गों ने एकजुट होकर न्याय और मानवाधिकारों के पक्ष में आवाज बुलंद की.

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