मुख्य बातें:
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Zila Parishad Meeting: किशनगंज जिले में पिछले काफी समय से जारी बदहाल विद्युत व्यवस्था और गहराते बिजली संकट को लेकर शुक्रवार को आयोजित जिला परिषद की सामान्य बैठक में भारी हंगामा और तीखी नाराजगी देखने को मिली. बैठक में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों के त्रिस्तरीय जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में चरमराई बिजली आपूर्ति का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठाया. जनप्रतिनिधियों ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्पष्ट किया कि अब जनता की परेशानी बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है.
लो-वोल्टेज और जर्जर तारों से जनता बेहाल; इन क्षेत्रों में सबसे बुरा हाल
समीक्षा बैठक के दौरान जिन क्षेत्रों की समस्याएं सबसे ज्यादा मुखर रहीं और जो मुख्य बिंदु सामने आए, वे निम्नलिखित हैं:
- प्रभावित मुख्य इलाके: जिला परिषद सदस्यों ने विशेष रूप से डुबानोची, फाला, मिर्जापुर, गोरूखाल, कुश्यारी और कस्बा कालियागंज समेत आधा दर्जन से अधिक बड़े क्षेत्रों में बदहाल बिजली व्यवस्था का कच्चा चिट्ठा सदन के सामने रखा.
- बुनियादी समस्याएं: जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इन इलाकों में चौबीस घंटे लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, जिससे बिजली रहने के बावजूद उपकरण शो-पीस बने रहते हैं. इसके अलावा घंटों अघोषित बिजली कटौती, दशकों पुराने जर्जर तार, महीनों से जले और खराब पड़े ट्रांसफार्मर, तथा ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग में होने वाली विभागीय देरी से आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है.
छात्रों, किसानों और व्यापारियों का फूटा दर्द; तालिका में समझें संकट का प्रभाव
बिजली की इस आंख-मिचौनी ने समाज के हर वर्ग को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया है, जिसकी रूपरेखा नीचे तालिका में दी गई है:
| प्रभावित वर्ग | बिजली संकट के कारण झेलनी पड़ रही वास्तविक परेशानी |
| किसान (Farmers) | पटवन और सिंचाई के समय बिजली गुल रहने या लो-वोल्टेज होने से फसलें सूखने की कगार पर हैं. |
| छात्र (Students) | रात के समय घंटों बिजली कटौती के कारण पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह बाधित हो रही है. |
| छोटे कारोबारी | वेल्डिंग, कुटीर उद्योग, और आटा चक्की जैसे छोटे व्यवसाय ठप होने से भुखमरी की स्थिति है. |
| घरेलू उपभोक्ता | भीषण उमस और गर्मी के बीच पानी की किल्लत और दैनिक जीवन के काम प्रभावित हो रहे हैं. |
Zila Parishad Meeting: अधिकारियों को दो टूक: नहीं सुधरे हालात तो होगा ‘जेल भरो आंदोलन’
बैठक में मौजूद बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता और अन्य संबंधित अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों ने सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा किया और सभी समस्याओं के स्थाई (परमानेंट) समाधान की मांग की.
सदन में मौजूद जिला परिषद सदस्यों और मुखिया संघ के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी है कि वे कागजी आंकड़ों की बाजीगरी बंद करें. यदि तय समय-सीमा के भीतर जर्जर तारों को नहीं बदला गया और नए ट्रांसफार्मर इंस्टॉल नहीं किए गए, तो क्षेत्र की आक्रोशित जनता को साथ लेकर बिजली कार्यालयों का अनिश्चितकालीन घेराव, धरना-प्रदर्शन और ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया जाएगा, जिसकी शत-प्रतिशत जवाबदेही बिजली विभाग और जिला प्रशासन की होगी.
इस तीखी चेतावनी और जनप्रतिनिधियों के आक्रामक तेवर के बाद अब पूरी गेंद बिजली विभाग के पाले में है. देखना होगा कि विभाग इस अल्टीमेटम के बाद धरातल पर कितनी मुस्तैदी से काम शुरू करता है, अन्यथा सीमांचल के इस जिले में बिजली को लेकर एक बड़ा कानून-व्यवस्था का संकट खड़ा होना तय माना जा रहा है.
