मशरूम की खेती पर आधारित व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का एसएसबी के उप कमांडेंट ने किया शुभारंभ
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी न सिर्फ देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि सीमावर्ती गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी सराहनीय योगदान दे रही है.
दिघलबैंक.भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी न सिर्फ देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि सीमावर्ती गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी सराहनीय योगदान दे रही है. इसी कड़ी में सोमवार को 12वीं वाहिनी एसएसबी के उप कमांडेंट सुस्वपन कुंडू की अध्यक्षता में एफ समवाय दिघलबैंक के द्वारा जीवंत गांव (वाइब्रेंट विलेज) टप्पू में मशरूम की खेती पर आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. इस अवसर पर सहायक कमांडेंट प्रिय रंजन चकमा, सहित समवाय के अन्य जवान भी उपस्थित थे. कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और वैकल्पिक आय के साधन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया.यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नागरिक कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 05 जनवरी से 21 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें 25 ग्रामीणों को मशरूम की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों को कम लागत में अधिक आमदनी के उपाय बताए जाएंगे. उप कमांडेंट सुस्वपन कुंडू ने सभी प्रशिक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एसएसबी का उद्देश्य सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार, स्वावलंबन और खुशहाली को बढ़ावा देना है.उन्होंने आशा जताई कि प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्रामीण इसे व्यवसाय के रूप में अपनाएंगे और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे. ग्रामीणों ने एसएसबी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें नया मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिल रहा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि एसएसबी की यह पहल वाइब्रेंट विलेज योजना को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है.सीमावर्ती क्षेत्र में एसएसबी द्वारा चलाए जा रहे ऐसे नागरिक कल्याण कार्यक्रम सुरक्षा के साथ विकास का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं.
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