ठाकुरगंज बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ियों पर आखिरकार सरकार की नजर गई है. शिक्षकों की पदस्थापना में भारी असमानता, कहीं जरूरत से ज्यादा, तो कहीं पूरी तरह कमी को लेकर शिक्षा विभाग ने अब उच्चस्तरीय समिति बनाकर इस समस्या को दूर करने की कवायद शुरू की है. जारी आदेश के अनुसार राज्य के प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक शिक्षकों की तैनाती में बड़े स्तर पर असंतुलन सामने आया है. कई स्कूल ऐसे हैं जहां विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ शहरी और सुविधाजनक क्षेत्रों में शिक्षकों की भरमार है. इस स्थिति ने शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर डाला है. इसी व्यवस्था की बीमारी को ठीक करने के लिए विभाग ने समिति गठित की है, जिसे 15 दिनों के भीतर स्थानांतरण नीति और रेशनलाइजेशन का पूरा खाका तैयार करना है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ समिति बनाकर समस्या का समाधान हो जाएगा, या फिर पहले की तरह यह भी कागजों तक सीमित रह जाएगा. शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि असली समस्या पोस्टिंग में पारदर्शिता की कमी, राजनीतिक दबाव और मनमानी तैनाती रही है. जब तक इन कारणों पर सख्ती नहीं होगी, तब तक रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रहेगी. अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस बार सिर्फ कागजी सुधार करती है या वाकई जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में सफल होती है. फिलहाल यह कदम शिक्षा व्यवस्था की पुरानी बीमारी को स्वीकार करने जैसा जरूर माना जा रहा है.
विषयवार सभी विद्यालयों में समान रूप से शिक्षकों की पदस्थापना के लिए विभाग उठा रहा कदम
जिसे 15 दिनों के भीतर स्थानांतरण नीति और रेशनलाइजेशन का पूरा खाका तैयार करना है.
