भारतीय रेल की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत आधुनिक सुविधाओं से संवारे जा रहे किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए नवनिर्मित सार्वजनिक शौचालय अभी शुरू भी नहीं हुआ है और इसका विधिवत उद्घाटन होना बाकी है, लेकिन इसके उपयोग में आने से पहले ही इसकी बाहरी दीवारों पर सीलन और गहरे नमी के निशान साफ उभर आए हैं.
उद्घाटन से पहले ही दीवारों पर उभरी नमी
ठाकुरगंज स्टेशन पर तैयार किए गए नए शौचालय की बाहरी दीवार पर कई जगहों पर सीलन के कारण काले और हरे रंग के बदरंग धब्बे साफ देखे जा सकते हैं.
आमतौर पर ऐसी स्थिति पुराने या जल-जमाव वाले ढांचों में देखने को मिलती है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब शौचालय में अब तक पानी की नियमित आपूर्ति और यात्रियों की आवाजाही शुरू ही नहीं हुई है, तो फिर दीवारों में इतनी तेजी से नमी कैसे समा गई?
निर्माण सामग्री और वाटरप्रूफिंग पर उठे सवाल
दीवारों पर उभरे सीलन के सही कारणों का पता केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही चल सकता है. निर्माण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:
- छत अथवा पाइपलाइनों से बारिश के पानी का रिसाव (सीपेज).
- नींव या दीवारों में उचित वाटरप्रूफिंग केमिकल और तकनीक का उपयोग न किया जाना.
- निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई ईंटों, प्लास्टर और बालू-सीमेंट के मिश्रण की कमजोर गुणवत्ता.
यात्रियों ने की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग
केंद्र सरकार की अमृत भारत योजना का मूल उद्देश्य देश के छोटे-बड़े स्टेशनों को विश्वस्तरीय और टिकाऊ यात्री सुविधाओं से लैस करना है.
ऐसे में ठाकुरगंज जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती स्टेशन पर नई संरचना का यह हाल कार्यदायी एजेंसी की मॉनिटरिंग और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है. स्थानीय यात्रियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) और संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग की है कि शौचालय को आम यात्रियों के लिए खोलने से पहले इसकी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए. साथ ही, सीलन के वास्तविक कारणों को दूर कर सुधार कार्य सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में रेलवे की संपत्ति बर्बाद न हो.
