मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की विशेष रिपोर्ट
Fire Safety: देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए भीषण और दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस राष्ट्रीय हादसे ने बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर के सामने भी एक बेहद असहज और यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है. क्या ठाकुरगंज का स्थानीय प्रशासन और नागरिक किसी बड़ी आपदा का इंतजार कर रहे हैं? नगर के पुराने और घनी आबादी वाले मोहल्लों की भौगोलिक विसंगतियां इस कदर भयावह हैं कि खुदा न खास्ता अगर यहाँ आग लगती है, तो दमकल और बचाव दल के कनिष्ठ कर्मियों को मुख्य घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता तक नसीब नहीं होगा.
दो बाइकों का निकलना भी दूभर; बिजली के लटकते तार और सटे मकान बने ‘टाइम बम’
नगर पंचायत की इस गंभीर विसंगति और भौगोलिक कड़ियों की मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं. ठाकुरगंज के पुराने रिहायशी और व्यावसायिक प्रक्षेत्रों में मकान एक-दूसरे से पूरी तरह सटे हुए हैं.
इन गलियों की चौड़ाई इतनी कम है कि दो मोटरसाइकिलों का आमने-सामने से गुजरना भी एक बड़ी फजीहत बन जाता है. इसके ऊपर से जर्जर बिजली के नंगे तारों का लाइव जाल और घरों के भीतर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों का असुरक्षित उपयोग पूरे इलाके को बारूद के ढेर में तब्दील कर रहा है. अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे सघन प्रक्षेत्रों में वेंटिलेशन न होने के कारण आग महज कुछ ही मिनटों में विकराल रूप संधारित कर सकती है.
Fire Safety: न कोई आदेश, न कोई मुस्तैदी; आदेश के इंतजार में बैठा स्थानीय प्रशासन
“दिल्ली हादसे के बाद जब ठाकुरगंज के बहुमंजिला भवनों, होटलों, कोचिंग सेंटरों और तंग बाजारों में फायर ऑडिट (अग्नि सुरक्षा जांच) को लेकर कनिष्ठ प्रभारियों से सवाल किया गया, तो नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने एक बेहद रटा-रटाया और विधिक दलील वाला बयान दिया. उन्होंने कहा कि अभी जिला मुख्यालय या वरीय कप्तानों से ऐसा कोई विशेष लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. आदेश मिलते ही नियमों के आलोक में विधिक कार्रवाई की जाएगी.”
हादसों से सबक लेना जरूरी; सिर्फ महानगरों की बपौती नहीं है आपदा
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के इस सुस्त ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताया है. लोगों का कहना है कि क्या विधिक जांच और मॉक ड्रिल संधारित करने के लिए प्रक्षेत्र में किसी बड़े मर्मस्पर्शी हादसे या कली-मजदूरों की जान जाने का इंतजार किया जाना अनिवार्य है?
आग कभी किसी छोटे कस्बे या महानगर का भेद नहीं करती, वह केवल प्रशासनिक लापरवाही की कड़ियों को ढूंढती है. ठाकुरगंज फिलहाल शांत है, लेकिन हवा में तैरता यह सवाल बेहद मौजूं है कि यदि आज आधी रात नगर के किसी बंद कोने में शॉर्ट सर्किट से आग धधक उठी, तो क्या लाचार जनता सिर्फ तबाही देखने को विवश हो जाएगी, या जिला कप्तानों द्वारा समय रहते कोई मुस्तैद और सुचारू विसंगति-निवारक कदम उठाया जाएगा?
