टीबी मुक्त भारत के लिए गांवों में पोर्टेबल एक्स-रे से हो रही जांच
टीबी मुक्त भारत के लिए गांवों में पोर्टेबल एक्स-रे से हो रही जांच
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
निक्षय पोर्टल के आधार पर चिह्नित क्षेत्रों पर दिया जा रहा विशेष फोकस
किशनगंज. क्षय रोग (टीबी) आज भी एक गंभीर संक्रामक चुनौती बनी हुई है, जो न केवल स्वास्थ्य को कमजोर करती है बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ भी डालती है. समय पर पहचान व पूर्ण उपचार के अभाव में यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है. इसी खतरे को देखते हुए जिले में 100 दिवसीय विशेष टीबी उन्मूलन अभियान का संचालन किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना व संदिग्ध मरीजों को जल्द से जल्द उपचार से जोड़ना है.
चिह्नित गांवों में सघन स्क्रीनिंग
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के डेटा के आधार पर जिले के उन गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक है. इन गांवों को अभियान का मुख्य केंद्र बनाया गया है. स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर सर्वे व स्क्रीनिंग कर रही हैं, ताकि कोई भी संदिग्ध मरीज जांच के दायरे से बाहर न रहे.
पोर्टेबल एक्स-रे मशीन बनी मददगार
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि इस अभियान में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहा है. अब मरीजों को लंबी दूरी तय कर अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं है. मेडिकल टीम सीधे गांवों में पहुंचकर मौके पर ही डिजिटल एक्स-रे कर रही है. इससे समय की बचत हो रही है व जांच की सटीकता भी बढ़ी है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवेंद्र कुमार ने भी तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक मशीनों व सघन स्क्रीनिंग से अभियान को नयी मजबूती मिली है.
निःशुल्क उपचार व पोषण सहायता
अभियान के तहत चिह्नित मरीजों को न केवल मुफ्त दवा दी जा रही है, बल्कि निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है ताकि उनके खान-पान में कोई कमी न रहे. स्वास्थ्यकर्मी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मरीज दवा का कोर्स पूरा करें, जिससे बीमारी के पुनः फैलने का डर समाप्त हो सके.
सामूहिक भागीदारी की अपील
हाल ही में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में सिविल सर्जन व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचपी के जिला समन्वयक के साथ मिलकर जनता से जागरूक बनने की अपील की. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टीबी मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा जब आमजन, जनप्रतिनिधि व स्वास्थ्यकर्मी मिलकर प्रयास करेंगे.