ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Railway Crossing: किशनगंज जिले का अग्रणी कस्बा ठाकुरगंज इन दिनों एक अदद ओवरब्रिज (ROB) के अभाव में विकास की पटरी पर हांफता नजर आ रहा है. ठाकुरगंज रेलवे क्रॉसिंग वर्तमान में नगर की सबसे विकराल यातायात और सुरक्षा जनित समस्या बन चुकी है. इस व्यस्ततम रेलखंड पर जैसे ही ट्रेनों के आवागमन को लेकर गुaggregate (फाटक) बंद होता है, वैसे ही पूरे शहर की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग जाता है. सड़क के दोनों ओर देखते ही देखते सैकड़ों छोटे-बड़े वाहनों की लंबी कतारें खड़ी हो जाती हैं, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हैं.
बार-बार बंद होता है फाटक, रेंगने लगती है जिंदगी
इस गंभीर समस्या से उत्पन्न होने वाली जमीनी कठिनाइयों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- ट्रेनों की बढ़ती संख्या, बढ़ता इंतजार: उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे (NFR) के इस महत्वपूर्ण रूट पर मालगाड़ियों और एक्सप्रेस ट्रेनों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है. इसके कारण दिनभर में यह फाटक बार-बार और लंबे समय तक बंद रहता है.
- रोजमर्रा के कामकाजी वर्ग त्रस्त: फाटक बंद होने का सबसे सीधा और बुरा असर सुबह के समय स्कूल-कोचिंग जाने वाले मासूम बच्चों, अपनी दुकानों व बाजारों तक पहुंचने की जल्दी में रहने वाले व्यापारियों और दैनिक मजदूरी करने वाले कामकाजी लोगों पर पड़ता है.
जान हथेली पर रखकर बंद फाटक के नीचे से निकल रहे हैं लोग
हादसे की आशंका का प्रतीक: इस अव्यवस्था के बीच लोगों की बेचैनी और प्रशासनिक बेरुखी इस कदर हावी है कि लोग अपनी जान हथेली पर रखकर बंद फाटक के नीचे से रेंगकर रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं. हाल ही में सामने आई एक डरावनी तस्वीर में एक स्कूली छात्रा बंद रेलवे फाटक के नीचे से अपनी साइकिल निकालकर ट्रैक पार करती दिखी. यह दृश्य केवल एक व्यक्ति की जल्दबाजी नहीं, बल्कि उस लाचारी और दशकों से अधूरी पड़ी बुनियादी सुविधा (अंडरपास/ओवरब्रिज) की ओर साफ इशारा करती है, जो किसी भी वक्त बड़े रेल हादसे का सबब बन सकती है.
एम्बुलेंस फंसी रहती है जाम में, नहीं है कोई वैकल्पिक मार्ग
गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट:
नगर के सबसे व्यस्ततम और बीचों-बीच स्थित इस रेलवे क्रॉसिंग के दोनों तरफ हजारों की घनी आबादी बसती है, जिनके पास शहर के मुख्य हिस्से या अस्पताल तक आने-जाने का कोई दूसरा समानांतर रास्ता नहीं है. स्थानीय नागरिकों के अनुसार, फाटक बंद रहने के कारण कई बार गंभीर मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस जाम के झाम में फंसी रह जाती है, जिससे समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की जान पर बन आती है.
ओवरब्रिज और अंडरपास अब सुविधा नहीं, ठाकुरगंज की अनिवार्य जरूरत
प्रशासनिक पहल की पुरजोर मांग:
बढ़ती आबादी, वाहनों के बढ़ते दबाव और जनसुरक्षा के मद्देनजर ठाकुरगंज के नागरिकों ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक और जिला प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की है.
मुख्य मांगें और निष्कर्ष:
- रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण: व्यस्तता को देखते हुए इस क्रॉसिंग पर अविलंब पक्के रेलवे ओवरब्रिज की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए.
- लाइट वेहिकल अंडरपास: यदि ओवरब्रिज में तकनीकी पेंच है, तो टोटो, बाइक और पैदल यात्रियों के लिए एक सुरक्षित अंडरपास (Subway) का निर्माण कराया जाए.
नगरवासियों का साफ कहना है कि ठाकुरगंज जैसे तेजी से बढ़ते व्यापारिक नगर के लिए अब ओवरब्रिज कोई लक्जरी या अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि जीवन जीने की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है. जब तक सरकार और रेल मंत्रालय इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक शहर का एक बड़ा हिस्सा इसी तरह बंद फाटक की बाधा और अकाल मौत के साये के बीच जीने को अभिशप्त रहेगा.
