बरसात में कच्ची सड़क पर चलना मुश्किल, खतरे की आंशका

खतरे की आंशका

पहाड़कट्टा- पोठिया प्रखंड के कोल्था पंचायत में आधा दर्जन गांव के हजारों ग्रामीणों को आज भी पक्की सड़क का इंतेजार है. बता दें कि कोल्था ग्राम पंचायत के सिंघिमारी, रंगामनी एवं बनबाड़ी सहित कई गांव दशकों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. उक्त गांव में आदिवासी और शेरशाहवादी समुदाय के लोग मुख्य रूप से निवास करते है. करीब 6 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क से लोगों को आवागमन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. खासकर बरसात के दिनों में मुश्किलें कई गुणा अधिक बढ़ जाती है. बारिश होते ही गांव की कच्ची सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे चलते समय थोड़ी भी असावधानी होने पर लोग फिसल कर गिर जाते है और जख्मी हो जाते है. प्रत्येक गांव करीब एक-एक किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है. इन सभी गांवों में गरीब एवं मजदूर वर्ग के लोग वास करते है. खेती-किसानी कर सभी ग्रामीण अपना जीवन-यापन करते हैं. सिंघीमारी गांव के स्थानीय ग्रामीण मो हुसैन, अकील अली, मो अली, मुशर्रफ अली, साकिर, शाहनवाज़ हुसैन, अफसर अली, अशफाक आलम ने बताया कि इन गांवों की करीब दस हजार की अधिक की आबादी है. यहां मुख्य रूप से शेरशाहवादी, आदिवासी, सुरजापुरी मुस्लिम वर्ग के लोग रहते है. कई बार स्थानीय मुखिया, जिला परिषद, विधायक को लोगों ने सड़क की समस्या से अवगत कराते हुए पक्की सड़क के निर्माण की मांग की. लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि वादा खिलाफी करने वाले जनप्रतिनिधियों को आगामी चुनाव में वोट की चोट से सबक सिखाया जाएगा.

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Published by: Awadhesh kumar

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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