सीमांचल के खेतों में उगता ''ग्रीन गोल्ड'' व खामोश आर्थिक क्रांति
'Green Gold' Growing in the Fields of Seemanchal—and a Silent Economic Revolution
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
बदलते फसल पैटर्न से किसान आत्मनिर्भर, पर प्रोसेसिंग यूनिट व बाजार की दरकार
ठाकुरगंज. सीमांचल के अंतिम छोर पर स्थित ठाकुरगंज इन दिनों एक खामोश लेकिन गहरी आर्थिक क्रांति का गवाह बन रहा है. यहां के खेतों में उगने वाला अनानास अब सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हजारों किसानों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है. ठाकुरगंज में अनानास की खेती एक खामोश आर्थिक क्रांति है क्योंकि खेती का पैटर्न बदल रहा है. किसानों की सोच बदल रही है.
पारंपरिक खेती से ”ग्रीन गोल्ड” तक का सफर
कुछ साल पहले तक इस इलाके में धान, गेहूं, केला, मक्का व जूट प्रमुख फसलें थीं. लेकिन बढ़ती लागत, कम मुनाफा व मौसम की अनिश्चितता ने किसानों को नये विकल्प खोजने पर मजबूर किया. इसी दौरान अनानास की खेती ने धीरे-धीरे अपनी जगह बनानी शुरू की. आज हालात यह हैं कि सखुआडाली, पथरिया, कुकुरबाघी, भातगांव व चुरली पंचायतों के दर्जनों गांवों में सैकड़ों एकड़ भूमि पर अनानास की खेती हो रही है. किसान बताते हैं कि जहां पारंपरिक खेती से साल भर में मुश्किल से गुजारा होता था, वहीं अनानास से एक ही चक्र में बेहतर आमदनी संभव हो रही है.
उत्पादन व अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े
अनानास की खेती से आंकड़ों में हुए बदलाव साफ दिखते हैं. प्रति हेक्टेयर 70 से 100 टन तक उत्पादन की संभावना और 18-24 महीने में तैयार होने वाली यह नकदी फसल स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनती जा रही है. हजारों किसानों की सीधी भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब फल उत्पादन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है.
बाजार व व्यवस्था की चुनौतियां
उत्पादन बढ़ने के बावजूद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. किसानों की मुख्य समस्याएं संगठित कृषि मंडी का उपलब्ध न होना, कोल्ड स्टोरेज का अभाव, बाजार तक सीधी पहुंच की कमी, बिचौलियों का दबदबा व लागत की तुलना में कई बार उचित मूल्य न मिलना आदि शामिल है.
प्रोसेसिंग यूनिट, बदलाव की कुंजी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ठाकुरगंज में अनानास आधारित उद्योग जैसे जूस प्लांट, जैम/जेली निर्माण या कट-फ्रूट पैकेजिंग यूनिट स्थापित हो जाएं, तो न केवल किसानों को बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों रोजगार भी पैदा होंगे.
प्राकृतिक वरदान व तकनीकी जरूरत
किशनगंज जिले की जलवायु, उच्च वर्षा व हल्की अम्लीय मिट्टी अनानास के लिए आदर्श है. हालांकि, वैज्ञानिक तकनीक का अभाव अब भी महसूस किया जा रहा है. जानकारों के अनुसार, यदि ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग व उन्नत किस्मों का उपयोग बढ़े, तो गुणवत्ता में और सुधार होगा. इसके लिए कृषि विभाग और केभीके के जरिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है.
विधायक ने की पहल, विधानसभा में गूंजा मुद्दा
क्षेत्र में बढ़ रही इस खेती को नयी दिशा देने के लिए राजनीतिक पहल भी तेज हो गयी है. ठाकुरगंज विधायक गोपाल अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया है. उन्होंने बताया कि इलाके में फूड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित कराने के लिए उद्योग व कृषि मंत्री से संपर्क जारी है. निजी निवेशकों से भी बातचीत की जा रही है. लक्ष्य ठाकुरगंज को अनानास उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाना है ताकि किसानों की आमदनी में इजाफा हो सके.