बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को हर माह 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने के बहुचर्चित ऐलान के बीच किशनगंज जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ताओं की आम शिकायत है कि 125 यूनिट के भीतर खपत रहने के बावजूद उनके स्मार्ट मीटर खाते से रोजाना राशि काटी जा रही है और कई उपभोक्ताओं का बैलेंस शून्य से नीचे यानी माइनस में चला गया है. सरकारी घोषणा और स्मार्ट मीटर के आंकड़ों के इस अंतर से आम उपभोक्ता पशोपेश में हैं कि आखिर बिजली मुफ्त हुई है या यह केवल कागजी घोषणा बनकर रह गई है.
मोबाइल स्क्रीन पर आंकड़ों का खेल: क्यों कट रहे पैसे?
स्मार्ट मीटर में कटौती को लेकर उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल अनुत्तरित हैं:
- अस्पष्ट कटौती: उपभोक्ताओं को यह समझ नहीं आ रहा कि काटी जा रही राशि पुराना बकाया है, मीटर का फिक्स्ड चार्ज है, कोई अन्य अधिभार है या फिर सॉफ्टवेयर की तकनीकी गड़बड़ी.
- पारदर्शिता का अभाव: पारंपरिक मीटरों के दौर में उपभोक्ताओं को भौतिक बिल मिलता था, जिसमें कुल खपत, यूनिट दर और विभिन्न मदों का स्पष्ट विवरण होता था. स्मार्ट मीटर ऐप में सिर्फ बैलेंस घटता हुआ दिख रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
असमंजस में उपभोक्ता: मुख्य समस्याएं और जमीनी हकीकत
उपभोक्ताओं द्वारा उठाई जा रही मुख्य आपत्तियां:
- माइनस में बैलेंस: कई उपभोक्ताओं का कहना है कि खपत 125 यूनिट के दायरे में होने के बावजूद मीटर का बैलेंस माइनस में दर्ज हो रहा है, जिससे बिजली गुल होने का डर सता रहा है.
- ग्रामीणों की दोहरी मार: ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी और डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण लोग ऐप के जटिल गणित को नहीं समझ पा रहे हैं. पैसे कटने पर उन्हें बार-बार प्रखंड व जिला बिजली कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
- योजना के धरातल पर सवाल: उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि 125 यूनिट बिजली नि:शुल्क है, तो मीटर सॉफ्टवेयर में उसकी स्पष्ट गणना दिखनी चाहिए कि कितनी यूनिट की सब्सिडी मिली और अतिरिक्त राशि किस मद में ली गई.
बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग
जिले के उपभोक्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने विद्युत विभाग से व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है:
- स्पष्ट ब्रेकअप जारी हो: विभाग ऐप और एसएमएस के माध्यम से कटौती का मदवार ब्योरा साझा करे.
- तकनीकी समाधान: जब तक सॉफ्टवेयर में 125 यूनिट मुफ्त का प्रावधान सुचारू रूप से लागू नहीं होता, तब तक बेवजह की कटौती पर रोक लगाई जाए.
- हेल्पडेस्क की स्थापना: उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर विशेष सहायता केंद्र सक्रिय किए जाएं.
