जहरीला पानी व खान-पान बन रहा किडनी-गॉल ब्लैडर स्टोन का कारण

जहरीला पानी व खान-पान बन रहा किडनी-गॉल ब्लैडर स्टोन का कारण

पौआखाली . घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच सीमांचल के जिलों में लोग आर्सेनिक व आयरन युक्त दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. इसका खौफनाक नतीजा यह है कि किशनगंज व पूर्णिया सहित आसपास के क्षेत्रों में गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) व किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. स्थानीय अस्पतालों और नर्सिंग होम में पहुंच रहे पथरी के मरीजों की तादाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है.

भूजल में आर्सेनिक व आयरन की अधिकता मुख्य वजह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या के पीछे सबसे बड़ा भौगोलिक कारण यहां का प्रदूषित भूजल है. सीमांचल के पानी में आर्सेनिक व लोहे की मात्रा मानक स्तर से कहीं अधिक है. लंबे समय तक इस दूषित पानी का सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है. पानी में घुले अत्यधिक खनिजों को फिल्टर करने में किडनी को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे क्रिस्टल जमने लगते हैं व पथरी का रूप ले लेते हैं.

खान-पान में न बरतें लापरवाही

अस्वास्थ्यकर खान-पान भी इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है. क्षेत्र के लोग भोजन में नमक और तीखे मसालों का अत्यधिक प्रयोग करते हैं. नमक की अधिकता किडनी में कैल्शियम के जमाव को बढ़ाती है. वहीं, भोजन में चावल की प्रधानता व हरी साग-सभ्यियों की कमी गॉल ब्लैडर स्टोन का प्रमुख कारण बन रही है. साथ ही, आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) अधिक होने के कारण पसीना ज्यादा निकलता है, लेकिन लोग उस अनुपात में पानी कम पीते हैं. शरीर में पानी की कमी से यूरिन गाढ़ा हो जाता है, जिससे स्टोन का खतरा बढ़ जाता है.

खेती में प्रयुक्त रसायन भी बन रहे खतरा

विशेषज्ञों ने एक और चौंकाने वाला कारण बताया है. सीमांचल में बड़े पैमाने पर होने वाली खेती में कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल होता है. ये रसायन रिसकर भूजल में मिल जाते हैं या खाद्य श्रृंखला के जरिये शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये जहरीले रसायन लीवर व गॉल ब्लैडर की कार्यप्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करते हैं, जिससे पथरी बनने की संभावना प्रबल हो जाती है.

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By AWADHESH KUMAR

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