ठाकुरगंज. शनिवार को हाफ डे की छुट्टी के बाद आदर्श मध्य विद्यालय ठाकुरगंज के मुख्य निकासी द्वार पर बच्चों की भीड़ दिखाई दी. सामने शहर की मुख्य सड़क केटीटीजे पर लगातार वाहनों की आवाजाही थी, जबकि गेट के आसपास आइसक्रीम और खाने-पीने के ठेले भी लगे हुए थे. ऐसे समय में बच्चों की सुरक्षित और व्यवस्थित निकासी के लिए शिक्षकों की मौजूदगी बेहद जरूरी थी, लेकिन सामने आई तस्वीर ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बच्चे सड़क की ओर बढ़ते रहे, वाहन गुजरते रहे
छुट्टी के बाद बच्चे बस्ते लेकर विद्यालय के मुख्य द्वार से बाहर निकल रहे थे. उसी दौरान मुख्य सड़क पर लगातार वाहन गुजर रहे थे. गेट के आसपास ठेले लगे होने के कारण भीड़ और बढ़ गई थी. ऐसे माहौल में बच्चों को व्यवस्थित तरीके से बाहर निकालना और उन्हें यातायात से सुरक्षित दूरी पर रखना चुनौतीपूर्ण नजर आया.
छुट्टी के समय शिक्षकों की मौजूदगी पर सवाल
सामने आए दृश्य में कई शिक्षक भी विद्यालय परिसर से बाहर निकलते दिखाई दिए. किसी को ट्रेन पकड़ने की जल्दी थी तो किसी को बस पकड़ने और जल्द घर पहुंचने की चिंता. सवाल यह नहीं है कि छुट्टी के बाद शिक्षक अपने घर क्यों जाना चाहते हैं, बल्कि सवाल बच्चों की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को लेकर है.
व्यस्त सड़क पर स्थित है विद्यालय
आदर्श मध्य विद्यालय ठाकुरगंज शहर की ऐसी मुख्य सड़क पर स्थित है, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है. ऐसे में विद्यालय की छुट्टी के समय सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्कता की जरूरत होती है. बच्चों को मुख्य सड़क पर उतरने से पहले व्यवस्थित करना, गेट के सामने भीड़ नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर सड़क पार कराने में मदद करना विद्यालय प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी बन जाती है.
ठेले और यातायात ने बढ़ाई चुनौती
विद्यालय के मुख्य द्वार के आसपास आइसक्रीम और खाने-पीने के ठेले लगे रहने से बच्चों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था और जटिल हो जाती है. बच्चे अक्सर ठेलों के आसपास रुकते हैं, जबकि उसी स्थान से वाहन भी गुजरते रहते हैं. ऐसे में किसी छोटी सी चूक से गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है.
हादसा नहीं, लेकिन व्यवस्था पर जरूर सवाल
यह तस्वीर किसी हादसे की नहीं है, लेकिन हादसे से पहले की सुरक्षा व्यवस्था पर जरूर सवाल खड़े करती है. क्या छुट्टी के समय शिक्षकों की ड्यूटी मुख्य निकासी द्वार पर निर्धारित है. यदि ऐसा प्रावधान है तो उस समय गेट पर बच्चों की सुरक्षा की निगरानी कौन कर रहा था. यदि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है तो व्यस्त मुख्य मार्ग पर स्थित विद्यालय के बच्चों की सुरक्षित निकासी की जिम्मेदारी किसकी है.
बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले
बच्चे विद्यालय से निकलकर अपने घर पहुंचने की जल्दी में थे और शिक्षक भी अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे. लेकिन दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है. बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी विद्यालय और उसके प्रबंधन की है. ऐसे में छुट्टी के समय मुख्य द्वार पर पर्याप्त शिक्षक या सुरक्षा कर्मी की तैनाती, ठेलों को व्यवस्थित स्थान पर रखना और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
